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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड का युग समाप्त (फोटो सोर्स- Pinterest)
Dehradun: उत्तराखंड के शिक्षा ढांचे में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है। राज्य में आगामी 1 जुलाई से 'उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड' का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसकी जगह अब नवगठित 'राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
इस बदलाव के साथ ही राज्य के सभी मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप नया पाठ्यक्रम प्रस्तावित किया जाएगा। शासन से अंतिम अनुमोदन मिलते ही इसे सख्ती से लागू कर दिया जाएगा, जिससे पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ अल्पसंख्यक छात्रों को आधुनिक और मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा सके।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, अब राज्य के मदरसों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कड़े नियमों से गुजरना होगा। प्राधिकरण से मान्यता प्राप्त ऐसे मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थानों को ही 'पीएम पोषण योजना' (मध्याह्न भोजन/मिड-डे मील) का लाभ मिलेगा, जो अनिवार्य रूप से विद्यालयी शिक्षा विभाग से संबद्ध (Affiliated) होंगे। प्राधिकरण जल्द ही इसके लिए विद्यालयी शिक्षा विभाग को एक आधिकारिक पत्र भेजने की तैयारी कर रहा है।
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बैठक में यह साफ कर दिया गया है कि जो मदरसे शिक्षा विभाग के तय मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें ही प्राथमिकता के आधार पर मान्यता दी जाएगी। ऐसे मदरसे जो अपने नाम के साथ जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर की मान्यता चाहते हैं, उन्हें शिक्षा विभाग के प्रचलित नियमों और बुनियादी सुविधाओं के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि संबद्धता (Affiliation) के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले मदरसों के मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द किया जाए।
1 जुलाई से होने जा रहे इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल का असर सिर्फ मदरसों पर ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी अल्पसंख्यक समुदायों पर पड़ेगा। नए कानून के लागू होते ही मुस्लिम समाज के साथ-साथ सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी समुदायों द्वारा संचालित सभी शिक्षण संस्थान इस नए 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' के दायरे में आ जाएंगे।
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मान्यता लेने के लिए सभी संस्थानों को तय नियमावली के अनुसार अपने संपूर्ण अभिलेखों (दस्तावेजों) के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस कदम से राज्य के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता और शिक्षा के स्तर में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
Location : Dehradun
Published : 23 June 2026, 12:49 PM IST