UP SIR 2026: चुनाव आयोग का बड़ा कदम; शेष राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया अप्रैल से लागू

भारत निर्वाचन आयोग देश के शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को अप्रैल 2026 से शुरू करने जा रहा है। आयोग ने 22 राज्यों और प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों को आवश्यक तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

Post Published By: Bobby Raj
Updated : 20 February 2026, 6:01 AM IST
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New Delhi: चुनाव आयोग ने देश के शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया अप्रैल 2026 से शुरू करने का ऐलान किया है। इस कदम का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना और इसे पूरी तरह सटीक बनाना है। आयोग ने संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग ने जून 2025 में आदेश जारी किया था कि पूरे देश में SIR कराया जाएगा, और अब इसे सभी शेष राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में अप्रैल 2026 से लागू किया जाएगा।

शेष राज्यों में अप्रैल से शुरू होगा SIR

चुनाव आयोग ने गुरुवार को 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर विशेष सघन पुनरीक्षण से पहले की आवश्यक तैयारियों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इसमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु, उत्तराखंड सहित अनेक हिस्से शामिल हैं।

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बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है और अन्य कुछ राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में यह पहले से ही जारी है। अब इन 22 राज्यों और प्रदेशों में अप्रैल से अगले चरण की शुरुआत की जाएगी, जिससे पूरे भारत में मतदाता सूची का पुनरीक्षण हो जाएगा।

एसआईआर के तहत सभी पात्र मतदाताओं के नामों को सही तरीके से सूची में शामिल करने, ग़लत नामों को हटाने और अन्य विसंगतियों को दूर करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि चुनावी प्रक्रिया अधिक सुगम, पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।

विरोध और चुनौतियां

हालांकि SIR को लेकर राजनीतिक विरोध और कुछ कानूनी चुनौतियां सामने आई हैं, इसमें विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोप लगाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई सुरक्षित रखी है, जिससे इस प्रक्रिया को लेकर कुछ विवाद भी बना हुआ है।

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इसके बावजूद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना है और किसी भी दबाव के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए नहीं जाएंगे। राज्य निर्वाचन अधिकारियों ने भी बताया है कि हटाए गए नाम आधिकारिक प्रक्रिया के तहत ही हटाए गए हैं।

SIR से क्या बदलाव होंगे

विशेष सघन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची को नई पहचान, सुधार और सत्यापन के साथ तैयार किया जाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि अधिकतम योग्य मतदाता सूची में शामिल हों और किसी भी ग़लत विवरण के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ही एसआईआर के दौरान करोड़ों मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं और ड्राफ्ट मतदाता सूची भी तैयार की गई है, जिससे सुधार के लिए मतदाताओं को अपनी जानकारी अपडेट करने का अवसर मिल रहा है।

चुनाव आयोग का यह निर्णय आगामी चुनावों को सुचारू और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पूरे देश में SIR के लागू होने से मतदाता सूची की पारदर्शिता और सटीकता में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों को मजबूत किया जाएगा।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 20 February 2026, 6:01 AM IST

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