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20 फरवरी 2026 की शाम आकाश में चंद्रमा और शनि एक ही राइट एसेन्शन पर दिखाई देंगे। चंद्रमा शनि के 4°38′ उत्तर से गुज़रेगा और लगभग 10% प्रकाशित, 3 दिन पुराना अर्धचंद्र होगा। इस युति के साथ अर्थशाइन भी स्पष्ट दिखेगा। यह दृश्य मीन तारामंडल में सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में नज़र आएगा।
पृथ्वी की चमक के दौरान चंद्रमा
New Delhi: खगोल-प्रेमियों के लिए 20 फरवरी 2026 की संध्या विशेष महत्व रखती है। इस दिन आकाश में चंद्रमा और शनि युति की स्थिति में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, दोनों खगोलीय पिंड एक ही राइट एसेन्शन (समकोण आरोहण) साझा करेंगे, जबकि चंद्रमा शनि के लगभग 4°38′ उत्तर से गुज़रेगा। उस समय चंद्रमा शुक्ल पक्ष का बढ़ता अर्धचंद्र होगा लगभग 10% प्रकाशित और 3 दिन पुराना। यह पतली चंद्र-कला संध्या के गहराते आकाश में अत्यंत आकर्षक प्रतीत होगी। दोनों पिंड मीन(Pisces) राशि तारामंडल में स्थित रहेंगे।
खगोलीय गणनाओं के अनुसार, निकटतम क्षण पर चंद्रमा का राइट एसेन्शन 00h 04m 30s और डिक्लिनेशन 2°47′ उत्तर होगा, जबकि शनि का राइट एसेन्शन भी 00h 04m 30s तथा डिक्लिनेशन 1°50′ दक्षिण रहेगा। चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग −9.9 और शनि का 1.0 होगा। हालांकि दोनों के बीच कोणीय दूरी अधिक होने के कारण वे एक ही टेलीस्कोप के दृश्य-क्षेत्र में साथ नहीं समाएंगे।
यह युग्म लगभग 18:23 (IST) पर पश्चिमी क्षितिज से करीब 20 डिग्री ऊपर दिखाई देना शुरू होगा, जब गोधूलि अंधकार में बदल रही होगी। सूर्यास्त के लगभग 2 घंटे 7 मिनट बाद, यानी 19:58 (IST) के आसपास दोनों पिंड अस्त हो जाएंगे। इस प्रकार अवलोकन के लिए लगभग दो घंटे का समय उपलब्ध रहेगा।
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नंगी आंखों से भी यह दृश्य देखा जा सकता है, बशर्ते प्रकाश-प्रदूषण कम हो। 10x50 बाइनोक्युलर से शनि का हल्का पीला रंग और चंद्रमा की चमक स्पष्ट दिखेगी। 200mm f/5.5 न्यूटोनियन टेलीस्कोप में कम पावर आईपीस (25mm या 30mm) का उपयोग कर पूरा चंद्रमा देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय शनि के छल्ले पृथ्वी के सापेक्ष ‘edge-on’ स्थिति में होंगे, जिससे वे दूरबीन में एक पतली रेखा जैसे दिखाई दे सकते हैं। एस्ट्रोफोटोग्राफी के शौकीन 50mm-100mm लेंस से वाइड-एंगल शॉट में चंद्रमा, शनि और मीन तारामंडल के तारों को कैद कर सकते हैं।
इस शाम का सबसे आकर्षक पहलू होगा अर्थशाइन। खगोल विज्ञान में इसे 'The old moon in the new moon’s arms' भी कहा जाता है। सामान्यतः हम चंद्रमा का वही भाग देखते हैं जिस पर सूर्य का सीधा प्रकाश पड़ता है, लेकिन अर्थशाइन के दौरान उसका अंधकारमय भाग भी हल्की धूसर-नीली चमक से प्रकाशित दिखाई देता है।
यह प्रभाव पृथ्वी द्वारा परावर्तित सूर्य-प्रकाश के कारण उत्पन्न होता है। पृथ्वी, अपने बादलों और बर्फ की सतहों के कारण, काफी प्रकाश अंतरिक्ष में परावर्तित करती है, जो चंद्रमा के अंधेरे हिस्से को रोशन कर देता है। 1% से 15% प्रकाशित चंद्र अवस्था में अर्थशाइन सर्वाधिक स्पष्ट दिखाई देता है, और 10% प्रकाश की स्थिति इसे देखने के लिए आदर्श मानी जाती है।
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इस घटना को कभी-कभी 'दा विंची ग्लो' भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी वैज्ञानिक व्याख्या 16वीं शताब्दी में 'लियोनार्डो दा विंची' ने की थी। यदि मौसम साफ रहा और अवलोकन स्थल प्रकाश-प्रदूषण से दूर हुआ, तो 20 फरवरी 2026 की यह खगोलीय जुगलबंदी विद्यार्थियों, शौकिया आकाश-निरीक्षकों और आम जन के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी।
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