अब हर सौदे का हिसाब देना होगा! UP RERA का नया नियम, चूक गए तो सीधे लगेगा 10,000 रुपये का जुर्माना

उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट एजेंटों के लिए बड़ा नियम लागू हो गया है। अब हर तीन महीने में कारोबार और लेन-देन की पूरी जानकारी जमा करनी होगी। रिपोर्ट देने में देरी हुई तो सीधा जुर्माना भरना पड़ सकता है। आखिर एजेंटों को कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी और इससे खरीदारों को क्या फायदा मिलेगा।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 20 June 2026, 11:53 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हजारों एजेंटों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब सिर्फ प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करवाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि हर सौदे और कारोबारी गतिविधि का रिकॉर्ड भी नियमित रूप से जमा करना पड़ेगा। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने नया नियम लागू करते हुए सभी पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के लिए तिमाही रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य कर दिया है। नियम का पालन नहीं करने वालों पर 10,000 रुपये का विलंब शुल्क लगाया जाएगा।

हर तीन महीने में देना होगा कारोबार का पूरा ब्योरा

UP RERA के नए निर्देशों के मुताबिक अब सभी रजिस्टर्ड रियल एस्टेट एजेंटों को हर तिमाही खत्म होने के 15 दिनों के भीतर अपनी कारोबारी गतिविधियों की रिपोर्ट ऑनलाइन जमा करनी होगी। इस रिपोर्ट में एजेंट द्वारा किए गए लेन-देन, बिक्री, लीज और अन्य व्यावसायिक जानकारी शामिल होगी।

अब तक यह व्यवस्था मुख्य रूप से बिल्डरों और प्रमोटरों पर लागू थी, लेकिन पहली बार एजेंटों को भी इस दायरे में लाया गया है। माना जा रहा है कि इससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक भरोसा मिलेगा।

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पहली रिपोर्ट में देना होगा पुराना रिकॉर्ड भी

नए नियम के तहत एजेंटों को सिर्फ वर्तमान तिमाही का ही नहीं बल्कि पंजीकरण मिलने की तारीख से अब तक किए गए सभी लेन-देन का विवरण भी पहली बार जमा करना होगा। इसके अलावा उन्हें कैश बुक, जर्नल, लेजर और ग्राहक रजिस्टर जैसे दस्तावेज व्यवस्थित तरीके से रखने होंगे। UP RERA ने साफ किया है कि इन रिकॉर्ड्स को कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। किसी जांच, शिकायत या कानूनी प्रक्रिया के दौरान एजेंटों को यह दस्तावेज प्राधिकरण या अधिकृत अधिकारी के सामने पेश करने पड़ सकते हैं।

नियम नहीं माना तो लगेगा जुर्माना

अगर कोई एजेंट तय समय के भीतर तिमाही रिपोर्ट जमा नहीं करता है तो उसे संबंधित तिमाही के लिए 10,000 रुपये का विलंब शुल्क देना होगा। यह कदम उन एजेंटों पर निगरानी मजबूत करने के लिए उठाया गया है जो बिना उचित रिकॉर्ड के काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से फर्जी लेन-देन, गलत जानकारी और ग्राहकों को गुमराह करने जैसी गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।

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नियमों में किया गया बड़ा संशोधन

UP RERA ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए "उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (जनरल) रेगुलेशन, 2019" के 11वें संशोधन को अधिसूचित किया है। साथ ही रेगुलेशन 54 का नाम बदलकर "द रियल एस्टेट एजेंट एनरोलमेंट, ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन एंड स्टैच्यूटरी कंप्लायंसेज" कर दिया गया है।

घर खरीदारों को मिलेगा बड़ा फायदा

UP RERA के चेयरमैन संजय आर. भूसरेड्डी के अनुसार रियल एस्टेट एजेंट खरीदारों और बिल्डरों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में उनके कामकाज का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से बाजार में विश्वास बढ़ेगा। साथ ही निवेशकों और घर खरीदने वालों को भी अधिक सुरक्षा मिलेगी।

Location :  Lucknow

Published :  20 June 2026, 11:53 AM IST

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