रामलला के दरबार में बढ़ा चढ़ावा, अब 6 नहीं 8 घंटे काम करेंगे गिनती करने वाले कर्मचारी

अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ चढ़ावे की गिनती का काम भी बढ़ गया है। इसी को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी 6 घंटे से बढ़ाकर 8 घंटे करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत नकद दान और अन्य अर्पण की गिनती, रिकॉर्ड, सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया को समय पर पूरा करने पर जोर दिया जाएगा।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 29 July 2026, 4:45 PM IST
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Ayodhya: अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ का असर अब मंदिर में होने वाले चढ़ावे की गिनती पर भी दिखाई देने लगा है। राम मंदिर में देश-विदेश से लगातार श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और इसी के साथ दानपात्रों समेत दूसरे माध्यमों से मिलने वाले चढ़ावे की मात्रा भी बढ़ रही है। बढ़ते काम को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की ड्यूटी का समय बढ़ा दिया है। अब तक चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारी प्रतिदिन 6 घंटे ड्यूटी करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत उनकी कार्य अवधि बढ़ाकर 8 घंटे कर दी गई है।

बढ़ती भीड़ के साथ बढ़ा चढ़ावे का काम

राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। सामान्य दिनों में भी बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन करने पहुंचते हैं। वहीं त्योहारों, खास धार्मिक अवसरों और सप्ताहांत में श्रद्धालुओं की संख्या और ज्यादा बढ़ जाती है। जितनी ज्यादा संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, उतना ही अधिक चढ़ावा भी मंदिर को प्राप्त होता है। दानपात्रों में मिलने वाली नकदी के अलावा ऑनलाइन दान और दूसरे माध्यमों से भी श्रद्धालु राम मंदिर के लिए अर्पण करते हैं।

अब 6 नहीं, 8 घंटे होगी ड्यूटी

नई व्यवस्था के तहत चढ़ावे की गिनती में लगे कर्मचारियों को अब रोजाना 8 घंटे काम करना होगा। पहले उनकी ड्यूटी 6 घंटे की थी। कार्य अवधि बढ़ने से गिनती का काम लगातार और व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। इससे रोजाना मिलने वाले चढ़ावे की गणना में देरी कम होने की उम्मीद है।

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सिर्फ पैसे गिनना नहीं, कई जिम्मेदारियां होती हैं

चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी केवल नोट और सिक्के गिनने तक सीमित नहीं है। चढ़ावे की राशि मिलने के बाद उसे गिनने, रिकॉर्ड तैयार करने और उसका सत्यापन करने जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इसके बाद संबंधित राशि को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया भी पूरी की जाती है। यानी चढ़ावे की गिनती से लेकर बैंकिंग और लेखा-जोखा सुरक्षित रखने तक कई चरण होते हैं।

पारदर्शिता और रिकॉर्ड पर भी जोर

ट्रस्ट की ओर से कर्मचारियों की ड्यूटी बढ़ाने के फैसले को सिर्फ बढ़ते काम से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। इसका एक उद्देश्य चढ़ावे की गणना और रिकॉर्ड की प्रक्रिया को और अधिक व्यवस्थित बनाना भी है। मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया दान धार्मिक आस्था से जुड़ा होता है। ऐसे में उसकी सही गणना, सत्यापन और रिकॉर्ड तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण है।

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त्योहारों और खास मौकों पर और बढ़ता है दबाव

अयोध्या में राम मंदिर के कारण सालभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। लेकिन त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर भक्तों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे मौकों पर मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा सप्ताहांत में भी श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ अयोध्या पहुंचती है।

समय पर पूरा होगा चढ़ावे का लेखा-जोखा

ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रद्धालुओं की ओर से प्राप्त होने वाले दान और अन्य अर्पण का लेखा-जोखा समय पर और सही तरीके से तैयार हो। कार्य अवधि बढ़ने के बाद कर्मचारियों को गिनती, रिकॉर्ड, सत्यापन और बैंकिंग से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा। इससे काम को लंबित रहने से रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Location :  Ayodhya

Published :  29 July 2026, 4:45 PM IST

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