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LPU हिंसा
नई दिल्ली: पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हुआ हंगामा कई सवाल छोड़ गया है। एक मोबाइल संदेश से शुरू हुई बेचैनी कुछ ही घंटों में हजारों छात्रों के आक्रोश में बदल गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी भीड़ का नेतृत्व कौन कर रहा था?
इस पूरे घटनाक्रम में न कोई छात्र नेता सामने आया, न कोई संगठन, न कोई ऐसा चेहरा जिसके साथ प्रशासन औपचारिक बातचीत कर सके। इसके बावजूद हजारों छात्र सड़कों पर उतर गए और मामला कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन गया।
शनिवार रात सोशल मीडिया पर एक छात्रा से जुड़ी कथित घटना के अलग-अलग दावे तेजी से वायरल हुए। कुछ संदेशों में दुष्कर्म, कुछ में सामूहिक दुष्कर्म और कुछ में आत्महत्या जैसे दावे किए गए।
हालांकि शुरुआती दौर में इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन लगातार फैल रही सूचनाओं ने छात्रावासों में बेचैनी बढ़ा दी।
रात बढ़ने के साथ छात्र बड़ी संख्या में बाहर आने लगे और करीब दो बजे जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी प्रदर्शन का असर दिखाई देने लगा।
पुलिस के सामने स्थिति इसलिए मुश्किल बनी क्योंकि सामने हजारों छात्र थे, लेकिन बातचीत के लिए कोई एक प्रतिनिधि नहीं था।
न कोई छात्र संगठन आगे आया, न कोई तय नेतृत्व। अलग-अलग छात्रावासों से छात्र अपने स्तर पर जुड़ते गए और सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाएं भीड़ के रुख को प्रभावित करती रहीं।
पुलिस को एक साथ दो मोर्चों पर काम करना पड़ा। एक तरफ कानून-व्यवस्था संभालनी थी और दूसरी तरफ वायरल दावों की सच्चाई का पता लगाना था।
सुबह पुलिस ने छात्रों के बयान के आधार पर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया। जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी छात्रों से जांच में सहयोग करने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
लेकिन इसके बावजूद तनाव कम नहीं हुआ। परिसर में तोड़फोड़, वाहनों को नुकसान और आगजनी की घटनाएं सामने आईं।
इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया की भूमिका सबसे अहम रही।
जिस डिजिटल माध्यम से कथित सूचनाएं तेजी से फैलीं, उसी माध्यम से प्रदर्शन, आगजनी और तनाव के वीडियो भी तेजी से वायरल होने लगे।
हर नया वीडियो छात्रों के बीच नई चर्चा और प्रतिक्रिया को जन्म दे रहा था। पुलिस के लिए यह पारंपरिक छात्र आंदोलन से अलग स्थिति थी, जहां आमतौर पर किसी संगठन या नेता से बातचीत कर समाधान निकाला जाता है।
एलपीयू में करीब 35 हजार छात्र पढ़ते हैं और बड़ी संख्या में विद्यार्थी कैंपस हॉस्टल में रहते हैं।
छात्रों की बड़ी संख्या और कई हॉस्टलों में तेजी से फैलती सूचनाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
डीआईजी नवीन सिंगला समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। कई जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि इतनी बड़ी भीड़ आखिर किसके नेतृत्व में आगे बढ़ रही थी।
प्रशासन के सामने ऐसी स्थिति थी जहां हजारों लोग मौजूद थे, लेकिन कोई एक चेहरा या संगठन जिम्मेदारी लेने के लिए सामने नहीं था।
यही वजह रही कि पुलिस के लिए बातचीत और हालात को नियंत्रित करना सामान्य छात्र आंदोलनों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
Location : New Delhi
Published : 28 September 2026, 12:08 PM IST