राम मंदिर चढ़ावा ट्रस्ट तक पहुंचा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, जांच को प्रभावी और पारदर्शी बनाने के निर्देश

श्री राम जन्मभूमि चढ़ावा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने एसआईटी में चार्टर्ड अकाउंटेंट और फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का आदेश देते हुए दो सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 27 July 2026, 6:41 PM IST
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New Delhi : श्री राम जन्मभूमि चढ़ावा मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अहम निर्देश दिए। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और एक फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए। अदालत का मानना है कि वित्तीय विशेषज्ञों के जुड़ने से चढ़ावे और उससे जुड़े लेनदेन की गहराई से जांच हो सकेगी और यदि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है तो वह स्पष्ट रूप से सामने आएगी।

'अभी हमारा पूरा ध्यान निष्पक्ष जांच पर है'

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि फिलहाल अदालत का मुख्य उद्देश्य निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि एसआईटी अपना काम पूरी स्वतंत्रता से करे और अदालत फिलहाल किसी अन्य मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करना चाहती। पीठ ने निर्देश दिया कि विस्तारित एसआईटी दो सप्ताह के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करे। इसके बाद अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

वरिष्ठ वकील ने उठाया चढ़ावे की पारदर्शिता का मुद्दा

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत के सामने कहा कि श्रद्धालु 500 और 1000 जैसी रकम आस्था के साथ दान करते हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि उनका दिया गया पैसा ट्रस्ट तक पहुंचा या नहीं। उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को प्राप्त चढ़ावे की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक की जा सकती है। जिससे दानदाताओं को पारदर्शी तरीके से जानकारी मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह पारदर्शिता सुनिश्चित करने का विषय है।

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फॉरेंसिक ऑडिटर की मौजूदगी से होगी गहन पड़ताल

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि जांच में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ फॉरेंसिक ऑडिटर की मौजूदगी जरूरी होगी। अदालत ने कहा कि अभी सभी सुझावों और मुद्दों को नोट किया जाए, लेकिन प्राथमिकता जल्द और निष्पक्ष जांच पूरी करने की है। इसी उद्देश्य से एसआईटी को दो सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

पहले भी अदालत दे चुकी है सख्त संदेश

इस मामले की पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि न्यायालय राजनीति करने का मंच नहीं हैं और इस मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। वहीं, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है। अब सभी की नजर दो सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई और एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी है।

Location :  New Delhi

Published :  27 July 2026, 6:41 PM IST

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