हिंदी
सुप्रीम कोर्ट का मास्टरस्ट्रोक (Img: Pinterest)
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ट्रेड सर्विस (ITS) के एक पूर्व अधिकारी को समय से पहले अनिवार्य रूप से रिटायर करने के मामले में केंद्र सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सरकार के इस कदम को मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताते हुए रिटायरमेंट के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि अधिकारी को मानहानि और कानूनी खर्च के लिए 15 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
यह मामला 1989 बैच के इंडियन ट्रेड सर्विस अधिकारी से जुड़ा है। अधिकारी का सर्विस रिकॉर्ड बहुत अच्छा था और उन्हें लगातार अच्छी परफॉर्मेंस रेटिंग मिलती रही थी। फरवरी 2018 में, UPSC की मंज़ूरी के बाद, मेरिट के आधार पर उन्हें जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर प्रमोट किया गया था। हालांकि, प्रमोशन के सिर्फ दो महीने बाद 10 मई 2018 को उन्हें फंडामेंटल रूल 56(j) के तहत अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया गया। सरकार की रिव्यू कमिटी ने कुछ पुराने गोपनीय रिकॉर्ड्स के आधार पर उन्हें 'बेअसर' (या 'डेडवुड') करार दिया था।
यह भी पढ़ें - 2030 से पहले जेल से बाहर नहीं आएगा गैंगस्टर अबू सलेम, सुप्रीम कोर्ट ने की मांग खारिज
अधिकारी ने अनिवार्य रिटायरमेंट और 'डेडवुड' करार दिए जाने के फैसले को पहले सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। वहां से राहत न मिलने पर वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि UPSC की मंजूरी से ऊंचे पद पर प्रमोट किए जाने के बाद अचानक और बिना किसी नए नकारात्मक रिकॉर्ड के किसी अधिकारी को 'बेअसर' घोषित करना अन्यायपूर्ण था।
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक तरफ तो विभाग अधिकारी को बड़ी ज़िम्मेदारी के काबिल मानकर प्रमोट करता है और दूसरी तरफ उसके कुछ ही समय बाद उन्हें 'डेडवुड' करार देकर नौकरी से हटा देता है। ये दोनों फैसले एक-दूसरे के उलट हैं। कोर्ट ने माना कि अधिकारी के खिलाफ की गई कार्रवाई मनमानी थी और यह सत्ता का दुरुपयोग था। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी सरकारी कर्मचारी को बिना ठोस आधार के अनिवार्य रूप से रिटायर नहीं किया जा सकता।
यह भी पढ़ें - “भगवान को क्यों परेशान कर रहे हो?”- महावीर जैन मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह अधिकारी को मानहानि के लिए 9 लाख रुपये और कानूनी लड़ाई के खर्च के तौर पर 6 लाख रुपये का मुआवजा दे। इसके अलावा उन्हें नौकरी से जुड़े सभी फायदे दिए जाएंगे मानो उन्हें कभी अनिवार्य रूप से रिटायर न किया गया हो। अगर इस दौरान उनके किसी जूनियर को प्रमोशन मिला हो तो वे भी 'नोशनल प्रमोशन' के फायदे के हकदार होंगे।
कोर्ट ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वे अधिकारी को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ऑफिस बुलाएं और उन्हें सम्मानजनक विदाई दें। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी को वही सम्मान मिलना चाहिए जो उन्हें उनके सामान्य रिटायरमेंट के दिन मिलता।
Location : New Delhi
Published : 10 September 2026, 3:04 PM IST