कृष्णा नदी जल विवाद: पानी के बंटवारे को लेकर आर-पार के मूड में आंध्र और तेलंगाना, जानिए क्या है पूरा विवाद

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच लंबे समय से चल रहे कृष्णा नदी जल बंटवारे के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी में हिस्सेदारी को लेकर लगातार मतभेद बने हुए हैं।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 10 September 2026, 2:41 PM IST
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New Delhi: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच लंबे समय से चल रहे कृष्णा नदी जल बंटवारे के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 14 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। दोनों राज्यों के बीच नदी के पानी में हिस्सेदारी को लेकर लगातार मतभेद बने हुए हैं। इस मामले में जल बंटवारे के मौजूदा फॉर्मूले, केंद्र सरकार की अधिसूचना और कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र से जुड़े अहम सवाल उठाए गए हैं।

66:34 के फॉर्मूले पर आंध्र प्रदेश का जोर

कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों की मांग अलग-अलग है। आंध्र प्रदेश मौजूदा 66:34 के जल बंटवारे के फॉर्मूले को जुलाई 2027 तक जारी रखने के पक्ष में है।राज्य का कहना है कि फिलहाल इसी व्यवस्था के तहत पानी का बंटवारा किया जाना चाहिए। आंध्र प्रदेश की ओर से इस व्यवस्था को आगे जारी रखने की मांग की जा रही है, ताकि जल संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर तत्काल कोई बदलाव न हो।

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तेलंगाना मांग रहा 50:50 हिस्सेदारी

दूसरी ओर तेलंगाना 66:34 के मौजूदा फॉर्मूले से सहमत नहीं है। तेलंगाना की मांग है कि कृष्णा नदी के पानी का दोनों राज्यों के बीच बराबर यानी 50:50 के अनुपात में बंटवारा होना चाहिए। तेलंगाना का तर्क है कि पानी के वितरण में उसे समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

2023 की केंद्र की अधिसूचना भी विवाद का हिस्सा

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में केंद्र सरकार की वर्ष 2023 की अधिसूचना को भी चुनौती दी गई है। इस अधिसूचना के जरिए अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम के तहत कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण-2 यानी KWDT-II को नए सिरे से संदर्भ भेजा गया था। आंध्र प्रदेश ने केंद्र के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। राज्य का कहना है कि इस तरह न्यायाधिकरण को नया संदर्भ भेजना संवैधानिक व्यवस्था और आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

दोनों राज्यों के आरोपों से बढ़ा विवाद

कृष्णा नदी के पानी को लेकर सिर्फ हिस्सेदारी का मामला ही नहीं है, बल्कि पानी के इस्तेमाल को लेकर भी दोनों राज्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। आंध्र प्रदेश ने आरोप लगाया है कि तेलंगाना नागार्जुन सागर परियोजना से बिजली उत्पादन के लिए अपनी ओर से मनमाने तरीके से पानी खींच रहा है। आंध्र प्रदेश का दावा है कि इस तरह पानी के इस्तेमाल से तय व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

वहीं, तेलंगाना ने आंध्र प्रदेश पर पोथिरेड्डीपाडु परियोजना के जरिए जरूरत से अधिक पानी निकालने का आरोप लगाया है। तेलंगाना का कहना है कि आंध्र प्रदेश द्वारा पानी की निकासी नियमों के अनुरूप नहीं की जा रही है।

KRMB की बैठकों में भी नहीं बनी सहमति

दोनों राज्यों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड यानी KRMB की बैठकों में भी कई बार चर्चा हो चुकी है। हालांकि, पानी के बंटवारे और उपयोग से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट की 14 अक्टूबर की सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के सामने दोनों राज्यों की ओर से जल अधिकारों, मौजूदा बंटवारा व्यवस्था और न्यायाधिकरण के अधिकार क्षेत्र को लेकर दलीलें रखी जाएंगी।

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फैसले का दोनों राज्यों पर पड़ेगा असर

कृष्णा नदी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पानी के बंटवारे को लेकर होने वाला कोई भी फैसला दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

14 अक्टूबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने विवाद से जुड़े कानूनी और जल अधिकारों के मुद्दों पर विस्तार से सुनवाई होने की उम्मीद है। इस मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई दोनों राज्यों के बीच कृष्णा नदी के पानी के बंटवारे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

Location :  New Delhi

Published :  10 September 2026, 2:41 PM IST

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