नीट परीक्षा का भविष्य ऑनलाइन मोड में? सुप्रीम कोर्ट की नजर नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स की सिफारिशों पर

सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा को ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करने पर कहा कि इसके लिए साइबर सुरक्षा और डेटाबेस के कड़े इंतजाम जरूरी हैं। कोर्ट नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार कर रहा है। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

Updated : 27 July 2026, 3:53 PM IST
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New Delhi: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी कानूनी प्रक्रिया के बीच एक बड़ा मोड़ आ गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नीट परीक्षा को पेन-पेपर मोड से हटाकर पूरी तरह ऑनलाइन (कंप्यूटर आधारित) कराने के विचार पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की सिफारिशों का इंतजार किया जा रहा है, जिसकी अध्यक्षता दिग्गज तकनीक विशेषज्ञ नंदन नीलेकणी कर रहे हैं। इस मामले की अगली अहम सुनवाई अब 3 अगस्त को तय की गई है।

साइबर सुरक्षा और डेटाबेस सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा प्रणाली को फिजिकल मोड से ऑनलाइन मोड में शिफ्ट करना कोई सामान्य बदलाव नहीं है। इसके लिए पूरी तरह से अलग, पुख्ता और नए सुरक्षा उपायों की जरूरत होगी। कोर्ट ने माना कि ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को देश भर में लागू करने से पहले साइबर सुरक्षा और डेटाबेस की सुरक्षा को लेकर चाक-चौबंद इंतजाम करना अनिवार्य है, ताकि किसी भी तरह की तकनीकी चूक या सेंधमारी की गुंजाइश न बचे।

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सुधाकर सिंह की याचिका और पेपर लीक विवाद का बैकग्राउंड

सुप्रीम कोर्ट में यह पूरी सुनवाई आरजेडी (RJD) सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर की गई याचिका पर हो रही है। यह मामला 3 मई को आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर पेपर लीक के गंभीर आरोप लगे थे। इन विवादों और हंगामे के बाद सरकार और NTA ने कड़ा कदम उठाते हुए 3 मई वाली परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया था और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल इसकी जांच सीबीआई (CBI) के हाथों में सौंपी गई है, जबकि दोबारा आयोजित की गई परीक्षा 21 जून को संपन्न हो चुकी है। इससे पहले 1 जून को सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून की परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया था।

दिग्गजों से सजी है नंदन नीलेकणी की हाई पावर टास्क फोर्स

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि सरकार ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के अनुरूप एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है।

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इस हाई-प्रोफाइल टास्क फोर्स में देश के जाने-माने तकनीकी और प्रशासनिक विशेषज्ञ शामिल हैं, जो परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह फूल-प्रूफ बनाने के उपायों पर काम कर रहे हैं। समिति के प्रमुख नंदन नीलेकणी हैं, और उनके साथ इस टीम में ये दिग्गज शामिल हैं-

एस. सोमनाथ: इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष

तपन डेका: इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक

वी. कामकोटि: आईआईटी (IIT) चेन्नई के निदेशक

अनीता करवाल: पूर्व शिक्षा सचिव

अमृत लाल मीणा: लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ

अब आगे क्या? 3 अगस्त को टिकी निगाहें

सुप्रीम कोर्ट ने आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की याचिका पर सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 3 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। कोर्ट अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि नंदन नीलेकणि के नेतृत्व वाली टास्क फोर्स अपनी रिपोर्ट में ऑनलाइन परीक्षा के संचालन को लेकर क्या नए और प्रभावी सुझाव देती है। इन सिफारिशों के आधार पर ही देश में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के भविष्य की नई रूपरेखा तय होगी।

Location :  New Delhi

Published :  27 July 2026, 3:53 PM IST

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