Supreme Court का सोनम रघुवंशी को सुझाव, आत्मसमर्पण करो नहीं तो गुण-दोष पर होगा फैसला

सोनम रघुवंशी मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान ऐसे सवाल और टिप्पणियां सामने आईं जिन्होंने पूरे मामले को नए मोड़ पर ला दिया। अदालत ने अगली प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं, जिससे अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई और होने वाले फैसले पर टिक गई हैं।

Updated : 22 July 2026, 12:02 PM IST
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New Delhi: हनीमून के दौरान पति राजा रघुवंशी की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी के आचरण पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल उठाते हुए उन्हें कोर्ट में आत्मसमर्पण कर केस का सामना करने का सुझाव दिया। इंदौर निवासी सोनम को जून, 2025 में व्यवसायी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। पिछले साल 23 मई को मेघालय के सोहरा इलाके में छुट्टियों के दौरान सोनम रघुवंशी अपने पति राजा रघुवंशी के साथ लापता हो गई थी। 2 जून, 2025 को सोनम के पति राजा का शव गहरी खाई में मिल था।

सोनम को जमानत दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पुलिस का कहना है कि सोनम ने किराये के हत्यारों के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश की थी। मेघालय की ट्रायल अदालत ने 27 अप्रैल, 2026 सोनम को जमानत दी थी और 29 जून, 2026 को मेघालय हाईकोर्ट ने जमानत रद्द करने की राज्य पुलिस की याचिका खारिज कर दी थी। जमानत के इस फैसले को मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट ने क्या पूछा

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने सोनम की ओर से पेश वकील से पूछा कि, आपकी मुवक्किल अपने आचरण को कैसे स्पष्ट करेंगी? पुलिस का कहना है कि वह मृतक के साथ उस स्थान पर गई थीं, जहां राजा पर हमला किया गया और उनकी मृत्यु हो गई थी। उसके बाद आपने क्या किया? यही मुख्य मुद्दा है। दूसरी बात, गिरफ्तारी के आधार को लेकर, क्या आपने इसे सबसे शुरुआती बिंदु पर उठाया था?

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

-जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोनम रघुवंशी के वकील से पूछा- पति पर हमले के बाद उन्होंने क्या किया? पीठ ने कहा जमानत पर गुण-दोष के आधार पर आदेश देंगे या सोनम को आत्मसमर्पण का निर्देश देंगे।

सोनम के वकील को दो-टूक, सरेंडर करो या मुकदमे...

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वह या तो गुण-दोष के आधार पर विचार कर आदेश पारित करेगी या सोनम को आत्मसमर्पण कर मुकदमे का सामना करने का निर्देश देगी। पीठ ने सोनम के वकील से कहा, अपने मुवक्किल से निर्देश लेकर अदालत के सामने वापस आएं।

क्यों मिली थी सोनम को मिली थी जमानत

हाईकोर्ट ने सोनम की जमानत इस आधार पर कायम रखी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के उचित लिखित आधार देने में विफल रही। गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1) (हत्या की सजा) के बजाय गलती से धारा 403 दर्ज हो गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने न्यायिक दिमाग का इस्तेमाल न करना करार दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि यह केवल एक क्लर्क के टाइपिंग की गलती थी और हत्या के इतने गंभीर मामले में केवल इस आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

जमानत पर रोक से इन्कार कर चुका है सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 3 जुलाई को हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया था। 9 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस सवाल को बड़ी पीठ को भेजने का संकेत दिया था कि क्या महज टाइपिंग की गलती से किसी गिरफ्तारी को अवैध ठहराया जा सकता है और आरोपी को जमानत दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि वह इस बात की बारीकी से जांच करेगा कि क्या अरेस्ट मेमो में टाइपिंग की गलती के आधार पर सोनम को जमानत देना हाईकोर्ट के लिए सही था।

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सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट के सामने क्या कहा?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया, शादी के तुरंत बाद यह जोड़ा हनीमून के लिए मेघालय गया था। आरोपी महिला पति को पहाड़ियों में एक सुनसान जगह पर ले गई। सोनम के प्रेमी की ओर से किराए पर लिए गए तीन लोग भी उनके पीछे पहुंचे। वहां सोनम के पति की हत्या कर दी गई और उसके बाद शव को खाई में फेंक दिया गया। आरोपी महिला मौके से भाग गई और बाद में गाजीपुर में अपने प्रेमी के कहने पर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

Location :  New Delhi

Published :  22 July 2026, 11:47 AM IST

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