कोयले की जगह अब गैस का इस्तेमाल! Tata Steel ने स्टील प्लांट में शुरू की ऐसी तकनीक, बदल जाएगी कहानी

Tata Steel ने स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ओडिशा के मेरामांडली प्लांट में देश का पहला Coke Oven Gas Injection Project शुरू किया गया है। इस तकनीक में कोक ओवन से निकलने वाली गैस को ब्लास्ट फर्नेस में इस्तेमाल किया जा रहा है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 10 September 2026, 1:11 PM IST
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Jamshedpur: कल्पना कीजिए, जिस गैस को अब तक स्टील प्लांट में इस्तेमाल के बाद जला दिया जाता था, वही गैस अब स्टील बनाने की प्रक्रिया में काम आए। सुनने में यह किसी भविष्य की तकनीक जैसा लगता है, लेकिन Tata Steel ने इसे औद्योगिक स्तर पर इस्तेमाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

कंपनी ने ओडिशा के मेरामांडली प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस-1 में देश का पहला Coke Oven Gas Injection Project सफलतापूर्वक शुरू किया है। इस तकनीक का मकसद स्टील उत्पादन के दौरान कोक की खपत को कम करना और प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में आगे बढ़ना है।

क्या है Coke Oven Gas?

स्टील बनाने में कोक का इस्तेमाल काफी महत्वपूर्ण होता है। कोक तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान एक गैस निकलती है, जिसे Coke Oven Gas यानी COG कहा जाता है। इस गैस में हाइड्रोजन के साथ अलग-अलग हाइड्रोकार्बन भी मौजूद होते हैं। पारंपरिक तौर पर इस गैस का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन जैसे कामों में किया जाता रहा है। कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में अतिरिक्त गैस को फ्लेयर भी किया जाता है।

ब्लास्ट फर्नेस में सीधे इंजेक्ट होगी गैस

स्टील प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस का इस्तेमाल आयरन ओर से लोहा बनाने की प्रक्रिया में किया जाता है। इस प्रक्रिया में कोक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। Tata Steel के नए प्रोजेक्ट में Coke Oven Gas को सीधे ब्लास्ट फर्नेस के ट्युअर्स यानी नोजल के जरिए इंजेक्ट किया जा रहा है। कंपनी ने यह तकनीक वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञ Paul Wurth-SMS और Kobelco के सहयोग से विकसित की है।

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आखिर इससे 'ग्रीन स्टील' की दिशा में कैसे मदद मिलेगी?

स्टील उद्योग दुनिया के उन औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जहां कार्बन उत्सर्जन कम करना बड़ी चुनौती है। पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया में कोक का इस्तेमाल होता है और इससे बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन होता है। ऐसे में अगर किसी प्रक्रिया में कोक की खपत कम की जा सके और उसकी जगह हाइड्रोजन युक्त गैस का इस्तेमाल बढ़ाया जाए तो कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में मदद मिल सकती है।

यही वजह है कि Coke Oven Gas Injection Project को Tata Steel के लो-कार्बन स्टील उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसे सीधे यह मान लेना सही नहीं होगा कि इस तकनीक से स्टील उत्पादन पूरी तरह शून्य-कार्बन हो गया है। ग्रीन स्टील की दिशा में जाने के लिए पूरी उत्पादन प्रक्रिया में उत्सर्जन कम करना जरूरी होता है।

कंपनी के बड़े लक्ष्य से जुड़ा है प्रोजेक्ट

Tata Steel के वाइस प्रेसिडेंट (टेक्नोलॉजी एंड R&D) सुबोध पांडे के मुताबिक, प्रक्रिया से निकलने वाली गैसों का पुनर्चक्रण कर बाहरी जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना टिकाऊ विनिर्माण के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनी का लक्ष्य 2045 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ना है। ऐसे में मेरामांडली प्लांट में शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट कंपनी की लंबी अवधि की डीकार्बोनाइजेशन रणनीति का हिस्सा है।

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उत्पादन लागत और ऊर्जा दक्षता पर भी नजर

इस तकनीक का फायदा सिर्फ कार्बन उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। अगर स्टील बनाने की प्रक्रिया में उपलब्ध गैस का बेहतर इस्तेमाल होता है तो ऊर्जा संसाधनों के उपयोग को अधिक कुशल बनाया जा सकता है। मेरामांडली के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशंस) सुधीर कुमार मेहता ने भी इस तकनीक को उत्पादन प्रक्रिया को अधिक किफायती और स्वच्छ बनाने की दिशा में अहम कदम बताया है।

स्टील उद्योग के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग?

भारत दुनिया के बड़े स्टील उत्पादक देशों में शामिल है और आने वाले वर्षों में स्टील की मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना भी उद्योग के सामने बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि स्टील कंपनियां कोयले और कोक पर निर्भरता कम करने, हाइड्रोजन का इस्तेमाल बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता सुधारने और औद्योगिक गैसों के पुनर्चक्रण जैसी तकनीकों पर काम कर रही हैं।

Tata Steel का मेरामांडली प्रोजेक्ट इसी बदलाव की एक मिसाल है। अगर Coke Oven Gas को बड़े स्तर पर प्रभावी तरीके से ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सका, तो भविष्य में यह स्टील उत्पादन को अधिक संसाधन-कुशल और कम-कार्बन बनाने में मदद कर सकता है।

Location :  Jamshedpur

Published :  10 September 2026, 1:11 PM IST

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