यूपी चुनाव से पहले सपा का ‘लाल-नीला’ दांव, बसपा के दलित वोट बैंक पर अखिलेश यादव की नजर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी ने दलित वोट बैंक पर अपनी नजरें तेज कर दी हैं। छात्र विंग की ड्रेस में नीले रंग के इस्तेमाल को बसपा के कमजोर होते जनाधार के बीच सपा की नई रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 10 September 2026, 1:08 PM IST
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में रंगों का अपना अलग महत्व रहा है। अब समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी छात्र विंग की ड्रेस में नीले रंग को प्रमुखता देकर नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। इसे सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए सपा की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, बसपा के कमजोर होते जनाधार के बीच दलित वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है। अखिलेश यादव की सपा भी अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले में दलितों की भागीदारी को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

नीले रंग के जरिए दलित मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश

नीला रंग लंबे समय से आंबेडकरवादी राजनीति और दलित पहचान से जुड़ा रहा है। ऐसे में सपा छात्र सभा की ड्रेस में नीले रंग को शामिल कर दलित समाज तक एक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है।

पार्टी का उद्देश्य यह दिखाना है कि दलित समुदाय को सपा के संगठन और राजनीति में भी सम्मानजनक स्थान दिया जा रहा है। इससे पहले विरोधी दल सपा पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह दलितों को सिर्फ चुनावी समीकरण के तौर पर इस्तेमाल करती है।

बसपा के कमजोर होने के बाद खाली हुई राजनीतिक जगह

उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक दलित राजनीति का प्रमुख चेहरा रही बहुजन समाज पार्टी अब पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। ऐसे में सपा इस खाली जगह को भरने की कोशिश में जुटी है।

विश्वविद्यालय और कॉलेज की राजनीति के जरिए युवा दलितों तक पहुंच बनाना सपा की लंबी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नए युवा कार्यकर्ताओं को जोड़कर आने वाले चुनावों के लिए संगठन को मजबूत करना चाहती है।

‘लाल-नीले’ समीकरण से बदल सकती है यूपी की राजनीति?

समाजवादी पार्टी का पारंपरिक रंग लाल रहा है, जबकि बसपा की पहचान नीले रंग से जुड़ी रही है। ऐसे में दोनों रंगों का राजनीतिक मेल यूपी में नए सामाजिक समीकरण की ओर इशारा कर रहा है।

अखिलेश यादव लगातार PDA को सामाजिक न्याय और सभी वर्गों की भागीदारी से जोड़ते रहे हैं। अब पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि PDA में दलित वर्ग सिर्फ एक हिस्सा नहीं बल्कि अहम भागीदार है।

अखिलेश ने भाजपा पर साधा निशाना

इस बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा को लोकतंत्र विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास और सरकारी संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया गया है।

अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण से जुड़े संस्थानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को खत्म या कमजोर किया है। उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनता के बीच सक्रिय रहने की अपील करते हुए 2027 विधानसभा चुनाव में जीत का दावा किया।

लोकदल अध्यक्ष से हुई चुनावी चर्चा

विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने भी अखिलेश यादव से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच 2027 चुनाव को लेकर चर्चा हुई।

सुनील सिंह ने कहा कि किसानों, युवाओं, मजदूरों और आम जनता के मुद्दों को लेकर समान विचारधारा वाले दलों के बीच बातचीत जरूरी है। उन्होंने मुलाकात को सकारात्मक बताया।

सपा ने संगठन और विचारधारा दोनों पर बढ़ाया फोकस

सपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवाद किया। इस दौरान उन्हें कई पुस्तकें भेंट की गईं और एक पुस्तक का विमोचन भी हुआ।

राजनीतिक रूप से देखें तो सपा अब चुनावी मुद्दों के साथ-साथ सामाजिक समीकरणों को भी मजबूत करने में जुटी है। नीले रंग के जरिए दलित समुदाय तक पहुंच बनाने की कोशिश इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

Location :  Lucknow

Published :  10 September 2026, 1:08 PM IST

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