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बारिश और तेज हवा से खेतों में गिर रही धान की फसल (Img: AI Generaed Image)
Sultanpur: जिल में करीब एक महीने से हो रही बारिश खरीफ फसलों के लिए अभी तक संजीवनी बनी हुई थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान में दाने पड़ने लगे हैं और अगेती किस्मों की बालियां पकने लगी हैं। ऐसे में खेतों में लगातार पानी भरा रहने के बीच तेज हवा चलने से कई जगह फसल खेत में ही गिरने लगी है।
खासकर जिले के तराई और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। अगर बारिश का यह सिलसिला लंबा खिंचा तो पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान की फसल को नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह के मुताबिक जिले में करीब 1.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरीफ फसलों की निगरानी की जा रही है। इसमें लगभग 10,800 हेक्टेयर में धान की खेती हुई है। उनका कहना है कि मौजूदा बारिश से किसानों की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन अगर सितंबर के अंत तक बारिश थम जाती है तो अभी बड़े नुकसान की आशंका नहीं है। हालांकि तराई क्षेत्रों से धान के खेतों में पानी भरने की सूचनाएं मिल रही हैं। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने की सलाह दी है।
सुल्तानपुर जिले के उपकृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह (Img: Dynamite News)
धान को पानी की जरूरत होती है, लेकिन पकने के समय लंबे समय तक खेत में पानी जमा रहना नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में किसान खेत की मेड़ों और निकासी नालियों की जांच कर अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का रास्ता बनाएं।
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उप कृषि निदेशक के अनुसार भारी बारिश के बावजूद जिले में धान की फसल में फिलहाल किसी बड़े रोग के प्रकोप की सूचना नहीं है। मक्का और बाजरे की फसल की स्थिति भी बेहतर बताई जा रही है।हालांकि लगातार नमी और बारिश के बाद मौसम साफ होने पर किसानों को फसल में रोग और कीट की निगरानी बढ़ानी होगी।
बारिश से संभावित नुकसान के बीच प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच है। उप कृषि निदेशक के मुताबिक वर्ष 2026-27 में 1,12,907 किसान योजना के तहत प्रीमियम जमा कर रहे हैं, जिससे करीब 10,680 हेक्टेयर फसल क्षेत्र बीमा कवरेज में आ सकता है। किसानों को प्रीमियम की रसीद और बीमा से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। फसल को नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय से सूचना देना जरूरी होगा।
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विभाग के अनुसार शासन स्तर से फसल क्षति को लेकर कोई सामूहिक घोषणा होने पर सर्वे के आधार पर पात्र किसानों को उसका लाभ दिया जा सकता है।
बारिश में राहत मिलते ही किसान पकने की अवस्था में पहुंच चुकी फसल की स्थिति देखें। यदि फसल कटाई योग्य है तो स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार कटाई की तैयारी की जा सकती है। गिरी हुई फसल को खेत सूखने के बाद संभालने की कोशिश करें। कटाई के बाद भी सावधानी जरूरी है। बारिश से नमी वाले धान को पर्याप्त सुखाए बिना भंडारित करने पर अनाज खराब होने का खतरा रहता है।
लगातार बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने 29 सितंबर तक अलर्ट जारी किया है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह ने लोगों से खराब मौसम में सुरक्षित स्थान पर रहने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है। किसानों के लिए भी यह सावधानी अहम है। जलभराव वाले खेतों में तेज बारिश, आकाशीय बिजली या विद्युत तारों की स्थिति में जोखिम लेकर खेत में जाने से बचना चाहिए।
Location : Sultanpur
Published : 25 September 2026, 1:29 PM IST