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जनपद में यूजीसी कानून 2026 के खिलाफ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को छात्रों और अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्थानों से जुलूस निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया।
बलिया में जोरदार विरोध
Ballia: जनपद में यूजीसी कानून 2026 के खिलाफ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को छात्रों और अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्थानों से जुलूस निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर यूजीसी काले कानून को वापस लेने की मांग की। विरोध प्रदर्शन में छात्रों और अधिवक्ताओं ने जोरदार नारेबाजी की और काले कानून के खिलाफ अपनी नाराजगी जताई।
टीडी कालेज के छात्र ओंकार सिंह के नेतृत्व में दर्जनों छात्रों ने टीडी कालेज चौराहे से जुलूस निकाल कर यूजीसी मुर्दाबाद, यूजीसी वापस करो, मोदी और अमित शाह मुर्दाबाद के नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद छात्र वापस टीडी कालेज चौराहा पहुंचे और यूजीसी काले कानून का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया। इस मौके पर छात्रों में सौरभ तिवारी, रिपुंजय रमण पाठक, अनुभव सिंह, दुर्गेश राय, अभिजीत तिवारी, अमन सिंह, जिम्मी चौबे, ज्ञानेंद्र सिंह, भानु तिवारी और अंकित तिवारी सहित दर्जनों अन्य छात्र मौजूद रहे।
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उधर, सिविल कोर्ट बलिया के अधिवक्ताओं ने आनंद कुमार सिंह के नेतृत्व में दर्जनों की संख्या में जुलूस निकाल कर कलेक्ट्रेट परिसर होते हुए थाना कोतवाली का रुख किया। अधिवक्ताओं ने भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ‘Promotion of Equity in Higher Education Regulations 2026’ को काला कानून करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की।
अधिवक्ताओं और छात्रों ने चेताया कि अगर यूजीसी काले कानून को तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया। इस प्रदर्शन ने प्रशासन और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि बलिया में छात्रों और अधिवक्ताओं की एकजुटता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।
बलिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना रहा। लोगों और ग्रामीणों ने छात्रों और अधिवक्ताओं के इस आंदोलन को गंभीरता से देखा। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया। वहीं, छात्रों और अधिवक्ताओं का कहना है कि उनका लक्ष्य केवल यूजीसी कानून को वापस कराना और शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करना है।