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सोनभद्र खदान हादसे में सात आदिवासी श्रमिकों की मौत के बाद सपा का 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों से मिला। मृतकों को श्रद्धांजलि दी और प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये का चेक सौंपा। सरकार से 50 लाख मुआवजे की मांग की।
पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचा सपा प्रतिनिधिमंडल
Sonbhadra: जिले में 15 नवंबर को हुए दर्दनाक पत्थर खदान हादसे में सात आदिवासी श्रमिकों की मौत के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी (सपा) का 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोनभद्र पहुंचा और खदान हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक-एक लाख रुपये का चेक वितरित किया।
सपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह हादसा सरकार की लापरवाही और अवैध खनन के बेलगाम होने का नतीजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केवल बड़े लोगों और पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है, जबकि गरीब, आदिवासी और मजदूरों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य होने के नाते सरकार की जिम्मेदारी है कि वह श्रमिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करे, लेकिन सोनभद्र जैसे खनिज संपन्न जिले में यह जिम्मेदारी पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है।
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प्रतिनिधिमंडल ने सोनभद्र में पोकलेन मशीनों और ब्लास्टिंग के जरिए हो रहे अवैध खनन पर गहरी चिंता जताई। सपा नेताओं का कहना था कि अवैध खदानों में न तो किसी तरह के सुरक्षा इंतजाम होते हैं और न ही खनन नियमों का पालन किया जाता है। गहरी खुदाई और खदान की दीवारों के ढहने से लगातार हादसे हो रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और आदिवासी मजदूरों को उठाना पड़ता है। इसके साथ ही खनन से फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्र में हवा इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि आम लोगों के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
वीरेंद्र सिंह ने सवाल उठाया कि जब ब्लास्टिंग और भारी मशीनों से खनन पर रोक के स्पष्ट नियम हैं, तो फिर प्रशासन अवैध खनन और उससे हो रहे प्रदूषण को रोकने में क्यों असफल है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन में लिप्त लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते प्रशासन आंख मूंदे बैठा है।
प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों को बांटे चेक
सपा प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से अवैध खनन में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। नेताओं ने कहा कि सोनभद्र अपनी खनिज संपदा और बिजली उत्पादन के जरिए प्रदेश को भारी राजस्व देता है, लेकिन इसके बावजूद यहां के स्थानीय लोगों की हालत बेहद दयनीय बनी हुई है। उन्होंने सरकार पर क्षेत्र की समस्याओं के प्रति असंवेदनशील होने का आरोप लगाया।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि हादसे के स्थल से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर ‘आदिवासी गौरव’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से मृतकों के प्रति न तो संवेदना जताई गई और न ही कोई आर्थिक सहायता दी गई। सपा नेताओं ने इसे सरकार की संवेदनहीनता करार दिया।
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सपा ने जानकारी दी कि इससे पहले सभी पीड़ित परिवार लखनऊ में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिले थे। उस दौरान अखिलेश यादव ने पीड़ित बच्चों को 30-30 हजार रुपये की नकद सहायता दी थी और प्रत्येक परिवार को एक लाख रुपये देने की घोषणा की थी, जिसे अब चेक के माध्यम से वितरित किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवारों की दयनीय स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई परिवारों में छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता हैं, जिनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सपा ने आश्वासन दिया कि भविष्य में उनकी सरकार बनने पर पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद दी जाएगी, जिसमें महिलाओं को आजीविका के लिए 40 हजार रुपये की सहायता भी शामिल होगी।
वहीं, हादसे में अपने परिवार के दो सदस्यों को खोने वाली एक पीड़िता ने बताया कि सपा प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक-एक लाख रुपये का चेक दिया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाए।
सपा ने अंत में सरकार से खदान की वैधता, सुरक्षा मानकों, श्रमिकों के बीमा और मुआवजे की व्यवस्था को लेकर उच्चस्तरीय जांच कराने तथा प्रत्येक पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग दोहराई।