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सोमवार को सोनभद्र जिला इकाई की गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी (गोंगंपा) ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। इस आंदोलन में कैमूर पर्वत श्रृंखला के क्षेत्रवासियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
सोनभद्र में उठी आदिवासियों की आवाज
Sonbhadra: सोमवार को सोनभद्र जिला इकाई की गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी (गोंगंपा) ने जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन आयोजित किया। इस आंदोलन में कैमूर पर्वत श्रृंखला के क्षेत्रवासियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आदिवासी ग्रामीण गोंगंपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकारी और निजी कंपनियों द्वारा लगाए जा रहे प्रोजेक्टों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
धरना प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति, जनजाति मंत्रालय, पर्यावरण विभाग, वन विभाग और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। गोंगंपा के रामाशंकर सिंह पोया ने आरोप लगाया कि सरकार विकास के नाम पर निजी कंपनियों के माध्यम से प्राकृतिक संपदा नष्ट कर रही है। इससे आदिवासी और जीव-जंतु विस्थापन के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि करोड़ों की संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं और जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास छीना जा रहा है, जिससे पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ रहा है।
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जिला उपाध्यक्ष तिरुमाल जगेश्वर कमरों ने कहा कि कैमूर श्रृंखला के गांवों में सात कंपनियों द्वारा विभिन्न प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। ये परियोजनाएं जल, जंगल, जमीन, जंगली जानवर, जीव-जंतु और आम जनजीवन को प्रभावित करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रवासी किसी भी कीमत पर इतना बड़ा नुकसान होने नहीं देंगे।
Sonbhadra: सोमवार को गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी (गोंगंपा) ने जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया। कैमूर पर्वत के आदिवासी ग्रामीणों ने सरकारी और निजी कंपनियों के प्रोजेक्टों के खिलाफ विरोध जताया।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 5, 2026
जिला कोषाध्यक्ष राम कुमार मरकाम ने बताया कि कंपनियों के लोग ग्रामीणों को बहला-फुसला कर रहे हैं और दबंगई कर फर्जी सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करवाने का प्रयास कर रहे हैं। ग्राम सभा की बैठक बुलाए बिना ही ग्राम प्रधानों, सदस्यों और अन्य लोगों से अलग-अलग दस्तावेजों पर दबाव डाला जा रहा है।
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तिरुमाल संतोष कुमार ने कहा कि सरकार कंपनियों के माध्यम से दलित, आदिवासी और मूल निवासियों की शांति और सुविधाएं छीन रही है। आदिवासियों को वनाधिकार के साथ पट्टा नहीं दिया जा रहा और कंपनियों के लिए जंगल उजड़वाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि सोनभद्र जिला अनुसूचित जाति और जनजाति बहुल होने के बावजूद इसे संविधान की पांचवीं व छठी अनुसूची के अनुसार अनुसूचित क्षेत्र घोषित नहीं किया गया।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि चुनाव लड़ने और वोट देने जैसे संवैधानिक अधिकार केवल राजनीतिक लाभ के लिए दिए जा रहे हैं। जनजातियों की जनसंख्या के अनुसार सीटों का वितरण नहीं किया गया, जिससे आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
गोंगंपा का यह जन आंदोलन दर्शाता है कि आदिवासी और स्थानीय समुदाय अपनी भूमि, जंगल और संसाधनों की रक्षा के लिए सजग हैं। उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं बल्कि सरकार और कंपनियों को जागरूक करना और प्राकृतिक एवं सामाजिक संतुलन बनाए रखना है।