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अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ (Image: Social Media)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी छह महीने से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन सियासी बिसात तेजी से बिछने लगी है। इस बार चुनावी मुकाबले का एक बड़ा केंद्र महिला मतदाता बनती दिखाई दे रही हैं। भाजपा के पास पहले से महिला लाभार्थियों का बड़ा नेटवर्क है, जबकि समाजवादी पार्टी सीधे आर्थिक मदद के वादों के जरिए इस वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में 2027 का चुनाव महिलाओं के लिए योजनाओं, सुविधाओं और सीधे आर्थिक लाभ की घोषणाओं की प्रतिस्पर्धा का मैदान बन सकता है।
चुनाव करीब आते देख भाजपा सरकार अपने संकल्प पत्र में किए गए महिलाओं से जुड़े वादों को जमीन पर उतारने की रफ्तार बढ़ा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार ने 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त बस यात्रा का ऐलान किया और अगले ही दिन इसे लागू भी कर दिया। इसके अलावा रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा देने का फैसला भी हर साल की तरह इस बार चर्चा में है। सरकार ने नवंबर 2026 तक स्नातक छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना लागू करने की घोषणा भी की है। इन फैसलों के जरिए भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपने काम और लाभार्थी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में दिख रही है।
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भी महिलाओं को लेकर अपना चुनावी एजेंडा तेज कर रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव को पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रमुखता से आगे बढ़ाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी आधी आबादी को चुनावी रणनीति के केंद्र में रख रही है। बुधवार को सपा की ओर से की गई घोषणाओं में युवाओं और महिलाओं को खास जगह दी गई। पार्टी सत्ता में आने पर महिलाओं को सालाना आर्थिक मदद देने की घोषणा कर चुकी है। इसके जरिए सपा भाजपा के महिला लाभार्थी आधार के सामने अपना अलग मॉडल पेश करने की कोशिश कर रही है।
महिला मतदाताओं को लेकर दोनों दलों की रणनीति अब सीधे आर्थिक लाभ के इर्द-गिर्द भी घूमती दिखाई दे रही है। भाजपा सरकार की ओर से महिलाओं को 50 हजार रुपये तक देने की संभावित योजना की चर्चा शुरू हुई, तो सपा ने सत्ता में आने पर महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये देने का ऐलान कर दिया। ऐसे में आने वाले समय में चुनावी चर्चा का एक हिस्सा संभावित तौर पर ₹40 हजार बनाम ₹50 हजार के मुकाबले में बदल सकता है। हालांकि राजनीतिक तौर पर असली सवाल सिर्फ रकम का नहीं होगा, बल्कि यह भी होगा कि मतदाता किस पार्टी की घोषणा पर ज्यादा भरोसा करते हैं।
भाजपा को महिला मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदा योजनाओं का फायदा मिलने की उम्मीद है। महिला सुरक्षा, उज्ज्वला योजना, आवास, शौचालय, बैंक खाते और प्रत्यक्ष लाभ जैसी योजनाओं के जरिए पार्टी महिला लाभार्थियों तक अपनी पहुंच का दावा करती रही है। अब इन योजनाओं के साथ प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ जोड़कर पुराने आधार को और मजबूत करने की कोशिश हो सकती है। वहीं सपा के सामने चुनौती अपने पारंपरिक PDA समीकरण में महिलाओं को मजबूती से जोड़ने की है। पार्टी आर्थिक मदद और महिला केंद्रित घोषणाओं के जरिए महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक 2027 के चुनाव में असली मुकाबला सिर्फ 40 हजार और संभावित 50 हजार रुपये का नहीं होगा। लड़ाई इस बात की भी होगी कि महिलाओं को किस पार्टी की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिला और भविष्य को लेकर किसके वादों पर ज्यादा भरोसा किया जाता है। भाजपा का तर्क होगा कि उसने जो वादे किए, उन्हें जमीन पर उतारा। वहीं सपा यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि जिन लोगों को अब तक पर्याप्त लाभ नहीं मिला, सत्ता में आने पर उन्हें सीधे आर्थिक मदद दी जाएगी। ऐसे में उत्तर प्रदेश की आधी आबादी इस बार सिर्फ वोटबैंक नहीं, बल्कि 2027 के चुनावी गणित को दिशा देने वाली निर्णायक ताकत बन सकती है।
Location : Lucknow
Published : 27 August 2026, 9:08 AM IST