Rajasthan High Court में घमासान! जज ने CJI सूर्यकांत को लिखे 3 पत्र, अब सामने आया सुप्रीम कोर्ट का बड़ा रुख

राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। एक वरिष्ठ न्यायाधीश की ओर से उठाए गए सवालों के बाद न्यायपालिका में चर्चा तेज हो गई। मामले पर सीजेआई सूर्यकांत की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद अब सभी की नजरें आगे होने वाली संस्थागत कार्रवाई पर टिकी हैं।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 27 August 2026, 9:43 AM IST
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Jaipur: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज और प्रशासनिक भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस मेहता ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को 2, 10 और 17 अगस्त को पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को राजस्थान से स्थानांतरित करने और हाईकोर्ट में नियमित चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग की है।

तीन पत्रों में उठाए गए गंभीर सवाल

जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों की प्रतियां सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के अन्य सदस्यों और राष्ट्रपति को भी भेजी हैं। पत्रों में आरोप लगाया गया है कि जस्टिस शर्मा का आचरण संस्थान के प्रमुख के अनुरूप नहीं है।

जस्टिस मेहता के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट के कई जजों की ओर से शिकायतें सामने आई हैं। इनमें न्यायिक कामकाज और कथित दबाव बनाने के रवैये को लेकर सवाल उठाए गए हैं। साथी जजों को स्थानांतरण जैसी कार्रवाई की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर स्थापित संस्थागत तंत्र के जरिए ही सख्ती से कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अपने आप में उनके खिलाफ निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। संबंधित न्यायाधीश को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।

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जर्मनी और ब्रिटेन के दौरे पर हैं CJI

सीजेआई सूर्यकांत इन दिनों चार दिवसीय जर्मनी और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। जर्मनी के कार्ल्सरूहे में संघीय न्यायालय के अध्यक्ष न्यायाधीश उलरिख हेरमन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान उन्होंने न्यायपालिका और तकनीक से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी बात की।

AI को लेकर भी CJI ने दिया बड़ा बयान

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI न्यायिक तर्क को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती।

उन्होंने बताया कि न्यायपालिका में AI का इस्तेमाल कानूनी शोध, फैसलों के 16 भाषाओं में अनुवाद और नागरिकों को मामलों की स्थिति तथा कानूनी प्रक्रिया की जानकारी देने जैसे सहायक कार्यों में किया जा रहा है।

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AI से नहीं होंगे न्यायिक फैसले

सीजेआई ने कहा कि तकनीकी साधनों का उद्देश्य दोहराए जाने वाले काम को कम करना है। AI न्यायिक फैसले तय नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट की AI समिति के मसौदा नियम प्रशासनिक इस्तेमाल, प्रतिलेखन और अनुवाद जैसे कार्यों की अनुमति देते हैं।

वहीं AI को गवाह की विश्वसनीयता, फरार होने के जोखिम, दोबारा अपराध करने की संभावना या जमानत की पात्रता का आकलन करने से रोकने की बात कही गई है।

न्यायिक स्वतंत्रता और भरोसा जरूरी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तकनीक और प्रशासनिक सुधार न्याय व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन सावधानीपूर्वक न्यायिक प्रक्रिया, मानवीय निर्णय और कानून के प्रति निष्ठा का स्थान नहीं ले सकते। उन्होंने न्यायिक स्वतंत्रता और लोगों के भरोसे को बनाए रखने को जरूरी बताया।

Location :  New Delhi

Published :  27 August 2026, 9:43 AM IST

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