बाढ़ में बह गई या डूब गई कार, तो क्या मिलेगा बीमा का पैसा? एक गलती से रिजेक्ट हो सकता है पूरा क्लेम

मानसून में बाढ़ या जलभराव से कार डूबने और बह जाने पर इंश्योरेंस क्लेम कैसे मिलेगा? जानें कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी, इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन और टोइंग से जुड़े जरूरी नियम। बंद गाड़ी स्टार्ट करने की गलती से बचें और पाएं पूरा मुआवजा।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 27 August 2026, 8:42 AM IST
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New Delhi: मानसून के मौसम में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के चलते हर साल हजारों गाड़ियां जलमग्न होकर पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं। जलभराव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर आपकी कार बाढ़ के पानी में फंस जाए, डूब जाए या तेज बहाव में बह जाए, तो क्या बीमा कंपनी आपको नुकसान की पूरी भरपाई करेगी? जवाब हां भी है और ना भी। दरअसल, बाढ़ से हुए नुकसान का क्लेम मिलना आपकी पॉलिसी के प्रकार और आपकी छोटी-सी समझदारी पर निर्भर करता है।

किस इंश्योरेंस में मिलेगा बाढ़ का मुआवजा?

अगर आपकी कार के पास सिर्फ अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस (Third-Party Insurance) है, तो बाढ़ से गाड़ी को पहुंचे नुकसान पर कंपनी एक भी रुपया नहीं देगी। प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा केवल कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी (Comprehensive Insurance) में ही मिलती है। यह पॉलिसी बाढ़, तूफान या बह जाने जैसी स्थिति में रिपेयरिंग या कार की मौजूदा कीमत का क्लेम देने का काम करती है।

इंजन कवर नहीं तो हो सकता है बड़ा नुकसान

बेसिक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी होने के बावजूद बाढ़ के दौरान इंजन में पानी घुसने (Hydrostatic Lock) से होने वाले नुकसान का क्लेम कई बार खारिज हो जाता है। इससे बचने के लिए policy में 'इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन' होना जरूरी है। इसके अलावा जीरो-डेप्रिसिएशन (Zero-Dep), कंज्यूमेबल्स और रोडसाइड असिस्टेंस जैसे ऐड-ऑन कवर आपको बिना किसी कटौती के पूरा पैसा दिलवाने में मदद करते हैं।

एक गलती और रद्द हो जाएगा क्लेम

पानी में डूबी या फंसी हुई गाड़ी में कभी भी 'सेल्फ' मारने या इंजन चालू करने की गलती न करें। यदि आप बंद कार को स्टार्ट करने की कोशिश करेंगे, तो पानी इंजन के अंदर खींच जाएगा। इंश्योरेंस कंपनियां इसे प्राकृतिक नुकसान न मानकर ड्राइवर की लापरवाही (Consequential Damage) मानती हैं और क्लेम तुरंत रिजेक्ट कर देती हैं।

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कार बहने या मिलने पर तुरंत क्या करें?

अगर कार तेज बहाव में बह जाती है और नहीं मिलती, तो पुलिस में FIR दर्ज कराकर 'अनट्रेस्ड रिपोर्ट' (Untraced Report) बनवाएं। इस स्थिति में कंपनी गाड़ी की IDV (Insured Declared Value) की पूरी रकम चुकाती है। वहीं, अगर कार पानी में फंसी है तो तुरंत उसकी फोटो-वीडियो बनाएं, कंपनी को सूचित करें और टो-ट्रक की मदद से ही सर्विस सेंटर भेजें।

Location :  New Delhi

Published :  27 August 2026, 8:42 AM IST

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