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नवरात्रि पर सजा लेहड़ा देवी मां का दरबार
Pharenda: महाराजगंज जिले के फरेंदा क्षेत्र स्थित शक्तिपीठ मां लेहड़ा देवी मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भक्तों का भारी तांता लगा हुआ है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन सुबह से ही श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने के लिए मंदिर में पहुंच रहे हैं और गाजे-बाजे के साथ पूजा-अर्चना की। इस मौके पर दूर-दूर से आए भक्तों का उत्साह देखने लायक है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक मां लेहड़ा देवी मंदिर की ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। यही वजह है कि दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मां लेहड़ा देवी मंदिर आज भी लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता ने जब मंदिर महंत ओम प्रकाश पाण्डेय से बात की तो उनका कहना है कि भक्तों की मां लेहड़ा देवी मंदिर में बहुत आस्था और विश्वास है। यहां सिर्फ शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि पर ही नहीं बल्कि पूरे साल ऐसे ही भक्तों का तांता लगा रहता है। ऐसी मान्यता है कि यहां दर्शन करने से लोगों के दुःख दूर हो जातें हैं। साथ ही मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। यही वजह है कि यहां घंटों बीत जाने के बाद भी भक्त माता के दर्शन के लिए लाइन में खड़े होकर इंतजार करते हैं।
नवरात्रि के अवसर पर यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है,जहां से लोग अपनी जरूरत का सामान खरीदते हैं।
दर्शन के लिए लगी श्रद्धालुओं की भीड़
फरेन्दा तहसील मुख्यालय से आठ किमी दूर स्थित लेहड़ा देवी मंदिर के संबंध में कई किवदंतियां है। पौराणिक मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना पांडवों ने अज्ञातवास के समय की थी। उस समय द्रौपदी ने मां से आंचल फैलाकर आशीर्वाद मांगा था, जिससे उन्हें विजयी होने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि धर्मराज युधिष्ठिर ने इसी स्थान पर यक्ष के प्रश्नों का सही उत्तर देकर अपने चारों भाइयों को पुनर्जीवित किया था। बाद में पांचों भाइयों ने यहां पीठ की स्थापना कर पूजा अर्चना शुरू की थी।
वहीं अगर बात करें ऐतिहासिक तथ्यों की तो चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपने यात्रा वृत्तांत में इस देवी स्थल का उल्लेख किया है। गौतम बुद्ध की माता माया देवी कोलिय गणराज्य की कन्या थीं। बुद्ध का बाल्यकाल इन्हीं क्षेत्रों में व्यतीत हुआ।
बुजुर्गों की मानें तो एक दिन लेहड़ा स्थित सैन्य छावनी के अधिकारी (लगड़ा साहब) शिकार खेलते हुए मंदिर परिसर में पहुंच गए। यहां पर भक्तों की भीड़ देख कर उन्होंने देवी की पिण्डी पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। कुछ ही देर में वहां खून की धारा बहने लगी। खून देख कर भयभीत अंग्रेज अफसर वापस कोठी की तरफ आ रहे थे कि घोड़े सहित उनकी मृत्यु हो गई। उस अंग्रेज अफसर की कब्र मंदिर के एक किमी पश्चिम में स्थित है। इस घटना के बाद लोगों की आस्था लेहड़ा देवी के प्रति और बढ़ गई।
Location : Maharajganj
Published : 22 September 2025, 11:06 AM IST
Topics : Maa Lehra Devi Maharajganj News (महाराजगंज न्यूज़) navratri 2025 Shaktipeeth Sharadiya Navratri 2025