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उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और सपा विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सपा सदस्य वेल में पहुंच गए और मंत्री के भाषण के कागज छीन लिए, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया।
बजट बहस के बीच अचानक बदला माहौल (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब कैबिनेट मंत्री संजय निषाद और समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों के बीच तीखी बहस हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई। आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित रही।
मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ संजय निषाद ने बुधवार को बजट की सराहना करते हुए अपने संबोधन में कांग्रेस और सपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि निषाद समुदाय ने अंग्रेजों और मुगलों के बाद 75 वर्षों तक "बेईमानों" से संघर्ष किया है। उनके इस बयान पर विपक्षी सदस्यों ने तीखी आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।
मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा ने अपने लंबे शासनकाल में मछुआ समाज के लिए कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनके विभाग के एक पद को उर्दू अनुभाग में परिवर्तित कर दिया गया और सवाल उठाया कि "क्या निषाद या मछली उर्दू पढ़ती है?" इस टिप्पणी पर सपा विधायकों का आक्रोश और बढ़ गया।
डॉ निषाद ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे पर राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कथित जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह शब्द समाज के लिए अपमानजनक है और इसकी सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।
मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो वह नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की पहल करेंगे। इस बयान के बाद सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
लगातार विरोध के बीच सपा विधायक सदन के वेल में पहुंच गए। हंगामे के दौरान कुछ विधायक मंत्री के पास पहुंचे और उनके हाथ से भाषण के कागज छीन लिए। दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालांकि मारपीट की गंभीर घटना नहीं हुई, लेकिन माहौल पूरी तरह अराजक हो गया।
संसदीय कार्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने इसे मंत्री पर हमले की कोशिश करार देते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह सपा का वास्तविक आचरण है और सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कृत्य है।
विवाद बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत कराया और सदन की कार्यवाही को मर्यादित ढंग से चलाने की हिदायत दी। अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन आचरण की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।