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हिंदू रक्षा दल की बैठक में आबादी बढ़ाने को लेकर किए गए विवादित ऐलान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी
Ghaziabad: उत्तर प्रदेश के शालीमार गार्डन इलाके में एक बैठक के दौरान दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी की मौजूदगी में की गई एक घोषणा ने सियासी और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। आबादी बढ़ाने और बच्चों की संख्या को लेकर दिए गए बयान के बाद लोग इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
चौथे और पांचवें बच्चे पर आर्थिक मदद का ऐलान
हिंदू रक्षा दल की बैठक के दौरान मंच से यह घोषणा की गई कि हिंदू परिवार एक या दो बच्चे ही पैदा कर रहे हैं, जबकि मुस्लिम परिवार ज्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं। इसी तर्क के साथ कहा गया कि अगर हिंदू परिवार चौथा बच्चा पैदा करता है तो उसे 21 हजार रुपये और पांचवें बच्चे पर 31 हजार रुपये दिए जाएंगे। यह ऐलान संगठन के एक सदस्य सूरज की ओर से किया गया, जबकि मंच पर पिंकी चौधरी मौजूद थे।
पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने की बात
बैठक में पिंकी चौधरी ने आगे कहा कि अगर हिंदू परिवारों के चार या पांच बच्चे होते हैं तो हिंदू रक्षा दल न सिर्फ आर्थिक मदद देगा, बल्कि चौथे और पांचवें बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उठाएगा। उन्होंने हिंदू परिवारों से अपनी आबादी बढ़ाने की अपील करते हुए इसे सनातन धर्म की रक्षा से जोड़ दिया।
वीडियो हुआ वायरल
इस पूरी बैठक का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया और लोगों ने इस बयान को लेकर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। कुछ लोग इसे निजी संगठन का बयान बता रहे हैं, तो कुछ इसे समाज को बांटने वाला बयान करार दे रहे हैं।
अपने बयान पर कायम पिंकी चौधरी
विवाद बढ़ने के बाद जब पिंकी चौधरी से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कहा, वह सही है। उनके मुताबिक यह बयान सनातन धर्म की रक्षा के उद्देश्य से दिया गया है और वह अपने शब्दों पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी समुदाय के खिलाफ बोलना नहीं, बल्कि हिंदू समाज को जागरूक करना है।
बढ़ सकती है सियासी गर्मी
फिलहाल इस बयान पर किसी प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन जिस तरह से वीडियो वायरल हो रहा है, उससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है। सोशल मीडिया पर बहस तेज हो चुकी है और नजरें इस पर टिकी हैं कि आगे प्रशासन या राजनीति इस पर क्या रुख अपनाती है।