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5 दिसंबर 2025 को हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना कार्यक्रम के दो महीने बाद भी सैकड़ों लाभार्थी उपहार सामग्री के लिए भटक रहे हैं। कुंदरकी क्षेत्र में हालात सबसे गंभीर बताए जा रहे हैं, और अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल उठ रहे हैं।
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Moradabad: कुंदरकी और आसपास के इलाकों में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का क्रोध बढ़ता जा रहा है। पांच दिसंबर 2025 को आयोजित कार्यक्रम के दो महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी सैकड़ों लाभार्थी अपनी उपहार सामग्री के लिए भटक रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति कुंदरकी क्षेत्र में है, जहां विभागीय अधिकारियों की जांच सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित नजर आ रही है।
मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत
कुंदरकी विधायक की शिकायत के बाद मामला सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार तक पहुंच गया। शिकायत में उपहार सामग्री न मिलने, अपात्र जोड़ों को लाभ देने और घटिया सामान बांटने की बात कही गई। अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत, जांच में देरी और पात्र लाभार्थियों के साथ धोखे के आरोप भी लगाए गए हैं।
सत्यापन पर शक
मनकरा गांव की एक महिला, जो पहले से एक बच्चे की मां हैं, उनको योजना में शामिल किए जाने की चर्चा ने सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़ा कर दिया है। अगर यह सही पाया गया तो पूरी योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा।
जांच में सुस्ती
डीएम अनुज सिंह ने दो सदस्यीय जांच समिति बनाई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विधायक ने समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उच्च स्तरीय या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
घटिया सामग्री और फर्जीवाड़ा
समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार पर घटिया सामग्री सप्लाई करने और वितरण में देरी करने का आरोप लगाया जा रहा है। डॉ. नवदीप यादव, मूंढापांडे ब्लॉक प्रमुख, का कहना है कि उनके ब्लॉक में करीब 25 प्रतिशत जोड़ों को उपहार सामग्री पूरी नहीं मिली। कई जगह गद्दों की जगह हिटलोन शीट दे दी गई और लाभार्थियों की संख्या असामान्य रूप से ज्यादा दिखाई गई, जो फर्जीवाड़े का संकेत है।
1200 विवाह, सिर्फ दो काउंटर
कार्यक्रम में 1200 विवाहों के लिए केवल दो काउंटर बनाए गए थे। नतीजा घंटों लाइन, धक्का-मुक्की और अफरातफरी। छोटे टेंट और कम भोजन स्टॉल के कारण लाभार्थी असंतुष्ट रहे। नौ दिसंबर 2025 को भी जिन लोगों को सामग्री नहीं मिली थी, उन्हें बुलाया गया, लेकिन वे भी खाली हाथ लौटे। लाभार्थियों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि उच्च स्तरीय, निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।