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चौरी चौरा के सनसनीखेज मां-बेटी हत्याकांड में सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस ने पालीग्राफ टेस्ट का सहारा लिया है। विरोधाभासी बयानों और अधूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए टीम गाजियाबाद रवाना हुई है।
मां-बेटी का फाइल फोटो
Gorakhpur/Ghaziabad: चौरी चौरा के शिवपुर चकदहा गांव में हुए दोहरे हत्याकांड ने न सिर्फ इलाके को दहला दिया था, बल्कि पुलिस की जांच को भी उलझाकर रख दिया। मां और मासूम बेटी की बेरहमी से की गई हत्या के पीछे आखिर कौन है, यह सवाल अब तक अनसुलझा बना हुआ है। बयान, सबूत और परिस्थितियां एक-दूसरे से टकरा रही हैं। अब इस खौफनाक वारदात की परतें खोलने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक जांच का रास्ता चुना है और पालीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
हत्या की साजिश और विरोधाभासी बयानों की सच्चाई सामने लाने के लिए पुलिस टीम गाजियाबाद रवाना हुई। CO कैंपियरगंज अनुराग सिंह की अगुवाई में गई टीम मुकदमा वादी, तीन नामजद आरोपितों और दो संदिग्धों का पालीग्राफ टेस्ट कराएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी।
यह सनसनीखेज वारदात 29 मार्च 2025 की देर रात करीब 1:30 बजे हुई थी। शिवपुर चकदहा गांव में घर के अंदर सो रही पूनम और उसकी छोटी बेटी अनुष्का की गड़ासे से काटकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के समय बड़ी बेटी खुशबू घर में मौजूद थी, जिसे हमलावरों ने दूसरे कमरे में बंद कर दिया था।
जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपित पूनम का मोबाइल फोन अपने साथ ले गए थे, जो एक सप्ताह बाद गांव के बाहर खेत में मिला। खुशबू ने पुलिस को बताया था कि उसने कमरे के दरवाजे के छेद से हमलावरों को देखा। उसकी तहरीर पर गांव के ही संजय उर्फ शैलेंद्र, उसके पिता कोटेदार सूरज, भाई सुरेंद्र और दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस को वादी के बयान और परिस्थितियों में कई विरोधाभास नजर आए।
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पुलिस ने नामजद आरोपित संजय को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जो फिलहाल जमानत पर बाहर है। विवेचना में आशंका जताई जा रही है कि इस हत्याकांड में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। अब तक 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ और 50 से अधिक संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा चुके हैं, लेकिन ठोस सबूत न मिलने से मामला अब भी अधर में लटका है। पुलिस को उम्मीद है कि पालीग्राफ टेस्ट सच और झूठ के बीच की दीवार गिरा देगा।
पॉलीग्राफ टेस्ट को 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' भी कहते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति से सवाल पूछे जाते हैं और उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाओं (जैसे हृदय गति, रक्तचाप, सांस लेने की दर और पसीना) को रिकॉर्ड किया जाता है। यह मानते हुए कि झूठ बोलने पर ये प्रतिक्रियाएं बदल जाती हैं। इस टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कोई व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। हालांकि, इसके नतीजे 100% सटीक नहीं होते और भारत में इसे सबूत के तौर पर अदालत में मान्य नहीं किया जाता। यह जांच में मदद करता है और कोर्ट की अनुमति से ही होता है।