11वीं शताब्दी की प्रतिमा, 200 साल पुराना मंदिर… गुप्त काशी शिवद्वार में श्रद्धालुओं का महासंगम

सोनभद्र के प्रसिद्ध गुप्त काशी शिवद्वार धाम में सावन के पहले सोमवार पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 5 हजार से अधिक कांवड़ियों सहित 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती का जलाभिषेक किया। मंदिर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 3 August 2026, 3:06 PM IST
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Sonbhadra: सोनभद्र का प्रसिद्ध गुप्त काशी शिवद्वार धाम सोमवार तड़के से ही 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंज उठा। सावन के पहले सोमवार पर हजारों श्रद्धालु और कांवड़िये पवित्र जल लेकर बाबा भोलेनाथ के दरबार पहुंचे। मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिला कि दिनभर दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला लगातार चलता रहा। प्रशासन के मुताबिक पहले सोमवार पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए, जबकि 5 हजार से ज्यादा कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया।

पहले सोमवार पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

सोनभद्र के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध शिव स्थलों में शामिल गुप्त काशी शिवद्वार धाम में सावन के पहले सोमवार पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मिर्जापुर, चुनार, बलिया घाट, विजयगढ़ और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में कांवड़िये पवित्र जल लेकर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर दिनभर "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंजता रहा। श्रद्धालु लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए। पूरे दिन दर्शन-पूजन और जलाभिषेक का क्रम बिना रुके चलता रहा।

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शिव-पार्वती की प्रतिमा का भी होता है जलाभिषेक

गुप्त काशी शिवद्वार धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। यहां श्रद्धालु केवल शिवलिंग का ही नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की प्राचीन प्रतिमा का भी जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र स्थान पर सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने और जल चढ़ाने से भगवान भोलेनाथ भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यही वजह है कि हर सावन में हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

200 साल पुराना मंदिर

मंदिर के प्रधान पुजारी अरविंद गिरी ने बताया कि सावन के पहले सोमवार पर पांच हजार से अधिक कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया। उन्होंने बताया कि उनका परिवार पिछले नौ पीढ़ियों से इस मंदिर में पूजा-अर्चना करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मंदिर का निर्माण 200 वर्ष से अधिक पुराना है, जबकि पुरातत्व विभाग के अनुसार यहां स्थापित शिव-पार्वती की प्रतिमा 11वीं शताब्दी की है। मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी एक साथ विराजमान हैं, जो इसे विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करता है।

15 दिन पहले से शुरू हो जाती हैं मेले की तैयारियां

मंदिर समिति के कार्यकर्ता संजय कुमार मोदनवाल ने बताया कि सावन मेले की तैयारियां करीब 15 दिन पहले से शुरू कर दी जाती हैं। पहले सोमवार पर पांच हजार से अधिक कांवड़ियों के अलावा कुल 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन और जलाभिषेक किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी मिर्जापुर, चुनार, बलिया घाट और अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे सावन माह यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें प्रशासन और मंदिर समिति मिलकर व्यवस्थाएं संभालते हैं।

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श्रद्धालुओं ने बताया दिव्य अनुभव

चोपन से पहुंचे श्रद्धालु निशु कुमार सोनकर ने बताया कि वह बचपन से शिवद्वार धाम की महिमा सुनते आ रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से लगातार सावन में यहां जलाभिषेक करने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां दर्शन करने के बाद मन को अद्भुत शांति और संतुष्टि मिलती है। उनका मानना है कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। वहीं करावा से आई श्रद्धालु अंकिता ने बताया कि वह पहले भी कई बार शिवद्वार धाम आ चुकी हैं। उनके अनुसार मंदिर का वातावरण बेहद शांत, भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सावन में एक बार इस पवित्र धाम के दर्शन करने की अपील की।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। क्षेत्राधिकारी घोरावल ने बताया कि मंदिर को सुबह 3 बजे मंगला आरती के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था। दर्शन शुरू होने से पहले बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की मदद से पूरे मंदिर परिसर की गहन जांच कराई गई।

Location :  Sonbhadra

Published :  3 August 2026, 3:06 PM IST

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