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महराजगंज के निचलौल विकास खंड में होली के नाम पर ग्राम प्रधानों और सचिवों से लाखों रुपये की कथित वसूली का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद जांच की मांग तेज हो गई है।
महराजगंज
Maharajganj: होली की खुशियों के बीच महराजगंज के निचलौल विकास खंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आरोप है कि होली पर्व पर “शुभकामना संदेश” के नाम पर ग्राम प्रधानों और सचिवों से कथित रूप से लाखों रुपये की वसूली की गई। जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, ब्लॉक कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई और अब पूरे मामले की जांच की मांग जोर पकड़ रही है।
एक क्लस्टर से 25 हजार, कुल रकम 5 लाख तक?
मामला महराजगंज जिले के निचलौल विकास खंड से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि एक क्लस्टर से करीब 25 हजार रुपये लिए गए। अगर विकास खंड में कुल 20 क्लस्टर मानें जाएं, तो यह रकम लगभग 5 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। हालांकि अभी तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इस वसूली की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ ग्राम प्रधानों और सचिवों ने अनौपचारिक तौर पर बताया कि उनसे यह कहकर पैसे लिए गए कि यह राशि स्थानीय स्तर पर होली के अवसर पर शुभकामना संदेश प्रकाशित कराने के लिए दी जाएगी। त्योहारों पर इस तरह की परंपरा पहले भी रही है, लेकिन इस बार जिस तरीके से क्लस्टरवार राशि जुटाए जाने की चर्चा है, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि ब्लॉक के एक जिम्मेदार पदाधिकारी और सचिव स्तर से जुड़े कुछ लोगों के माध्यम से यह रकम एकत्र की गई। हालांकि अब तक न तो कोई लिखित आदेश सामने आया है और न ही कोई आधिकारिक बयान। ऐसे में मामला और ज्यादा पेचीदा होता जा रहा है।
जब खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो ब्लॉक कार्यालय में हलचल तेज हो गई। सूत्रों का दावा है कि खबर को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कुछ लोगों ने पैरवी भी की। इससे संदेह और गहरा गया है कि आखिर मामला क्या है और पर्दे के पीछे कौन है।
जांच की मांग तेज
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि क्लस्टरवार वसूली की बात सही है तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला बन सकता है। ऐसे में पारदर्शी जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई जरूरी है, जिससे भविष्य में त्योहारों के नाम पर इस तरह की कथित वसूली न हो सके।