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माघ मेला 2026 में टेंट कंपनियों की लापरवाही से कल्पवासियों को पहले ही दिन से परेशानी का सामना करना पड़ा है। 25-26 प्रतिशत शिविर अभी तक नहीं लगे हैं और जहां टेंट लगाए गए हैं, वहां बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। संतों और गृहस्थों ने मेला प्रशासन से दोषी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
टेंट की कमी से संतों को हो रही परेशान
Prayagraj: माघ मेला 2026 का आयोजन शनिवार से शुरू हो गया, लेकिन पहले ही दिन टेंट कंपनियों की लापरवाही ने कल्पवासियों को खासी परेशानी में डाल दिया। मेला प्रशासन को टेंट कंपनियों की लापरवाही के कारण तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। संतों और गृहस्थों का कहना है कि उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए और टेंट कंपनियों को काली सूची में डाल कर उन पर जुर्माना लगाया जाए। इस मामले में मेला प्रशासन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि टेंट कंपनियां हर साल इस तरह की लापरवाही करती हैं, जिससे कल्पवासियों को हर बार दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
माघ मेला में कल्पवास के लिए संतों और गृहस्थों का आना शुरू हो चुका है, लेकिन टेंट कंपनियों के अनियंत्रित तरीके से शिविरों की व्यवस्था ना होने के कारण उन्हें पहले दिन से ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां एक हफ्ते से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन टेंट नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण कल्पवासियों में नाराजगी की लहर है और वे मेला प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने कल्पवासियों के लिए टेंट लगाने के लिए भारी भरकम बजट आवंटित किया था, लेकिन टेंट कंपनियों की लापरवाही के कारण हर साल समस्या बनी रहती है। इस बार भी 25-26 प्रतिशत कल्पवासियों के शिविर अभी तक नहीं लग पाए हैं। न सिर्फ टेंट की व्यवस्था में देरी हुई है, बल्कि जहां टेंट लगे हैं, वहां बिजली-पानी के कनेक्शन भी नहीं हो सके हैं। कई कल्पवासी दूसरों के टेंट में शरण लेकर अपना कल्पवास शुरू करने को मजबूर हुए हैं।
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माघ मेला में विशेष रूप से सेक्टर 5, 6 और 7 में समस्या बढ़ी हुई है। संत शिवालिका ने बताया कि पिछले एक हफ्ते से वह टेंट कंपनी के गोदाम के चक्कर काट रहे थे, लेकिन अब तक उनका शिविर नहीं लगाया जा सका। एक अन्य कल्पवासी राजेश नारायण ने कहा कि उन्हें 12 जनवरी के बाद टेंट लगाने की तारीख दी गई है। अब वे मेला में आए हैं और दूसरे संत के टेंट में शरण लेकर अपना कल्पवास शुरू किया है।
माघ मेला के लिए बनाए गए अस्थायी बस स्टैंड और पार्किंग स्थलों में भी व्यवस्थाओं का अभाव दिखाई दे रहा है। टायलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। बेला कछार पार्किंग में शनिवार को यात्रियों ने नाराजगी जाहिर की और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए।
कल्पवासियों का कहना है कि सर्दी में बाहर खुले में रहना मुश्किल हो रहा है। कड़ाके की सर्दी के बीच टेंट नहीं लग पाना और दूसरी बुनियादी सुविधाओं का न होना एक बड़ा संकट बन गया है। ऐसे में संतों की सुरक्षा और उनका स्वास्थ्य भी खतरे में पड़ा हुआ है।
मेला प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि हर साल इस तरह की समस्या क्यों आती है। वहीं, टेंट कंपनियों को बार-बार लापरवाही के बावजूद क्यों काम करने का मौका मिलता है? मेला प्राधिकरण की ओर से संतों और गृहस्थों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना होगा।
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संतों और गृहस्थों ने मेला प्रशासन से मांग की है कि टेंट कंपनियों की लापरवाही के कारण होने वाली असुविधा का सही तरीके से समाधान किया जाए। इसके साथ ही दोषी कंपनियों को काली सूची में डालकर उन पर जुर्माना भी लगाया जाए।
मेला प्रशासन का कहना है कि वे इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं और स्थिति को जल्द से जल्द सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन ने कहा है कि वे टेंट कंपनियों के साथ मिलकर इस मुद्दे का हल निकालने का प्रयास करेंगे ताकि कल्पवासी शांति से अपने ध्यान और पूजा में लगे रहें।