प्रयागराज माघ मेला 2026: पहली बार किन्नर अखाड़े के संतों का पूर्ण कल्पवास, रचने जा रहा इतिहास

माघ मेला 2026 का आयोजन 3 जनवरी से 15 फरवरी तक प्रयागराज में होगा। पहली बार किन्नर अखाड़े के 25 संत पूर्ण विधि-विधान से कल्पवास करेंगे। भजन करती साध्वियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे मेले को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 3 January 2026, 1:07 PM IST
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Prayagraj: प्रयागराज में माघ मेला 2026 का आयोजन इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रहा है। साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। माघ मेले का पहला स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर 3 जनवरी को होगा। संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए देशभर से श्रद्धालु, साधु-संत और कल्पवासी प्रयागराज पहुंचने लगे हैं। इसी बीच माघ मेले से जुड़ी एक खास और अनोखी खबर सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

पहली बार माघ मेले में किन्नर अखाड़े का कल्पवास

इस बार माघ मेले में पहली बार किन्नर अखाड़ा के 25 संत पूर्ण विधि-विधान से कल्पवास करेंगे। किन्नर अखाड़े के संत संगम तट पर अपना शिविर लगाकर पूरे माघ महीने तक कल्पवास का पालन करेंगे। इसे माघ मेले के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। इससे पहले कुंभ मेलों में किन्नर अखाड़े की मौजूदगी देखी गई थी, लेकिन माघ मेले में इतने बड़े स्तर पर कल्पवास पहली बार हो रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भजन का वीडियो

माघ मेले से पहले ही किन्नर अखाड़े की साध्वियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में किन्नर अखाड़े की साध्वियां भजन गाते हुए और भक्ति में झूमती नजर आ रही हैं। वीडियो में साध्वियों का उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा साफ झलक रही है, जिसे देखकर लोग उनकी भक्ति और समर्पण की तारीफ कर रहे हैं। यह वीडियो प्रयागराज से सामने आया है और माघ मेले को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता और बढ़ा रहा है।

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भूमि पूजन के साथ शिविर की शुरुआत

किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी कल्याणी नंद गिरि, जिन्हें छोटी मां के नाम से भी जाना जाता है, ने माघ मेले में शिविर की स्थापना से पहले विधिवत भूमि पूजन किया। भूमि पूजन के साथ ही किन्नर अखाड़े के संतों ने कल्पवास की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पूरे माघ मास के दौरान संत संयम, साधना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों में लीन रहेंगे।

शास्त्रों में कल्पवास का महत्व

ब्रह्म पुराण के अनुसार पौष शुक्ल एकादशी से माघ शुक्ल एकादशी तक कल्पवास का विधान बताया गया है। इस परंपरा का पालन माघ मेले में श्रद्धालु सदियों से करते आ रहे हैं। मान्यता है कि कल्पवास और संगम स्नान से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और आत्मिक शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। किन्नर अखाड़े का इस परंपरा में शामिल होना माघ मेले की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाता है।

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अध्यात्म और समर्पण का प्रतीक है किन्नर अखाड़ा

किन्नर अखाड़ा भारतीय समाज में अध्यात्म, समर्पण और समानता का प्रतीक बनकर उभरा है। इसकी स्थापना अक्टूबर 2015 में 2016 के सिंहस्थ कुंभ से पहले हुई थी। तब से यह अखाड़ा लगातार विस्तार कर रहा है और अब तक कई महामंडलेश्वर और मंडलेश्वर बना चुका है। किन्नर अखाड़ा न केवल धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय है, बल्कि किन्नर समुदाय के सामाजिक और धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी कार्य करता है। कुल मिलाकर, माघ मेला 2026 में किन्नर अखाड़े का कल्पवास न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक एकता का भी संदेश देता है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 3 January 2026, 1:07 PM IST

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