कोल्हुई: आर्थिक तंगी ने तोड़ा हौसला, आत्महत्या करने निकले कर्मचारी के लिए देवदूत बना ये जवान

कोल्हुई थाना क्षेत्र में एक स्वास्थ्य कर्मी की ज़िंदगी मौत से बस कुछ कदम दूर थी। बृजमनगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आरोग्य मंदिर, शिकारगढ़ पर तैनात सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) रविवार सुबह अपने कमरे में सुसाइड नोट छोड़कर डंडा नदी के किनारे पहुँच गए।

Updated : 8 February 2026, 10:09 PM IST
google-preferred

Maharajganj: कोल्हुई थाना क्षेत्र में एक स्वास्थ्य कर्मी की ज़िंदगी मौत से बस कुछ कदम दूर थी। बृजमनगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आरोग्य मंदिर, शिकारगढ़ पर तैनात सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) रविवार सुबह अपने कमरे में सुसाइड नोट छोड़कर डंडा नदी के किनारे पहुँच गए। दो महीने से सैलरी न मिलने की मार ने उन्हें इतना तोड़ दिया था कि जीने की कोई वजह न बची थी।

नदी किनारे बेसुध रोते रहे, परिवार की यादें चुभीं

नदी के तट पर बैठे वह छलांग लगाने की कोशिश करते-करते रुक गए। आँखों के सामने माँ-बाप का चेहरा, पत्नी की उम्मीदें घूम गईं। "कैसे छोड़ दूँ उन्हें?" यह सवाल दिल में चुभ गया। हिम्मत टूट गई, शरीर धराशायी हो गया। वह वहीं बैठकर फूट-फूटकर रोने लगे—ऐसा रोना जो सिर्फ़ दर्द नहीं, बल्कि व्यवस्था की क्रूरता की चीख था। दो महीने से कोई पैसा नहीं आया। घरवालों को कुछ भेज नहीं पा रहे, खुद खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं। अकेलेपन और मजबूरी ने उन्हें जीने से ही विरक्त कर दिया था।

महराजगंज में ग्राम चौपाल का आयोजन, DM संतोष कुमार शर्मा ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

एसएसबी जवानों ने थामा जीवन का सहारा

काफी देर तक नदी किनारे अकेले बैठे देख एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के गश्ती दल के जवानों ने उन्हें देखा। बिना किसी हिचकिचाहट के पास गए, उनकी पीड़ा सुनी, आँसू पोंछे। घंटों समझाया—"भाई, रुक जाओ... परिवार इंतज़ार कर रहा है। सब ठीक हो जाएगा।" उन्होंने हाथ थामा, गले लगाया और आखिरकार उन्हें सुरक्षित उनके कमरे तक पहुँचाया। एक छोटी सी मानवीयता ने एक परिवार को बिखरने से बचा लिया।

महराजगंज में युवक की निर्मम हत्या से उबाल, गिरफ्तारी की मांग पर अड़े परिजन; कब तक मिलेगा इंसाफ?

विभाग ने जताई मदद की बात

सीएचसी अधीक्षक सुशील गुप्ता ने बताया कि वेतन एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) से आता है और दो महीने से देरी से स्वास्थ्य कर्मी परेशान हैं। घटना की जानकारी फैलते ही विभाग में हलचल मच गई। लोगों ने मदद का हाथ बढ़ाया और अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि मानवीय आधार पर हर संभव सहायता की जाएगी।

आज वह ज़िंदा हैं, क्योंकि कुछ लोग अभी भी इंसानियत को जीवित रखते हैं। लेकिन सवाल वही है—कब तक मजबूरियाँ इंसानों को मौत की ओर धकेलती रहेंगी? काश, हर टूटते दिल के पास ऐसे ही कोई हाथ हो जाए।

 

Location : 
  • Maharajganj

Published : 
  • 8 February 2026, 10:09 PM IST

Advertisement
Advertisement