एक दौर था जब गूंजती थीं मशीनों की आवाजें और अब पसरा सन्नाटा, जानें कानपुर की शान लाल इमली के इतिहास की पूरी दास्तान

कानपुर की ऐतिहासिक लाल इमली वूलेन मिल कभी अपनी बेहतरीन शॉल, कंबलों और 60 नंबर लोई के लिए पूरी दुनिया में मशहूर थी।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 18 September 2026, 6:53 PM IST
google-preferred

Kanpur: कानपुर की औद्योगिक पहचान की कहानी लाल इमली के बिना अधूरी मानी जाती है। एक दौर था जब इस मिल परिसर में हजारों श्रमिक काम करते थे। मशीनों की आवाज और तैयार होने वाले ऊनी कपड़ों की मांग ने लाल इमली को कानपुर की पहचान का हिस्सा बना दिया था। लेकिन वक्त के साथ मिल की रफ्तार थमती गई और अब यहां पहले जैसी चहल-पहल नजर नहीं आती।

कंबल और शॉल की थी अलग पहचान

लाल इमली में तैयार होने वाले ऊनी वस्त्र, कंबल और शॉल, 60 नम्बर लोई कभी बाजार में खास पहचान रखते थे। सेना के लिए वस्त्र भी बनते थे यहां तैयार माल की आपूर्ति देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों तक होने की बात भी सामने आती रही है। लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह बताते हैं कि कानपुर को ‘मैनचेस्टर’ की पहचान दिलाने में लाल इमली का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके मुताबिक, वूलेन मिल में एक समय यहां तैयार होने वाली शॉल और ऊनी वस्त्रों की काफी मांग थी। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा यहां की टूज शॉल पसंद किए जाने की बात भी वह बताते हैं।

यह भी पढ़ें - Kanpur News: बाढ़ का पानी उतरा तो कटरी में बढ़ी नई मुसीबत! जमा पानी और गंदगी से बीमारी का डर

लाल इमली नाम के पीछे पेड़ की कहानी

मिल के नाम को लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा बताया जाता है। परिसर में लाल सुर्ख रंग की इमली देने वाले पेड़ हुआ करते थे। तभी से लाल इमली नाम से जोड़कर देखा जाता है। धीरे-धीरे यही नाम मिल की पहचान बन गया।

हर घंटे सुनाई देती थी घंटाघर की आवाज

मिल परिसर में बना क्लॉक टावर भी इसकी पुरानी पहचान का हिस्सा है। बताया जाता है कि टावर में लगा घंटा हर घंटे बजता था। उस समय आसपास के लोगों को भी इसकी आवाज से समय का अंदाजा हो जाता था। करीब पांच किलोमीटर के दायरे तक घंटी की आवाज पहुंचने की बात कही जाती है।

यह भी पढ़ें - Kanpur Dehat: चेन छीनकर कहां उड़ाए रुपये, इनामी बदमाश की खुली कहानी

2013 के बाद थम गया उत्पादन

लाल इमली को फिर से शुरू करने की मांग कई बार उठी, लेकिन मिल पुराने स्वरूप में दोबारा शुरू नहीं हो सकी। वर्ष 2013 के बाद यहां उत्पादन बंद है। परिसर में मौजूद कई मशीनें अब भी पुराने दौर की कहानी कहती हैं। कुछ मशीनें ऐसी भी हैं जिन्हें लंबे समय से खोला तक नहीं गया। अजय सिंह बताते है कि पूर्व सांसद पचौरी जी और वर्तमान सांसद रमेश अवस्थी जी ने हम सबके लिए प्रयास कर रहे हैं।

सांसद बोले- पुराने स्वरूप में चलाना मुश्किल

लाल इमली के भविष्य को लेकर सांसद रमेश अवस्थी का कहना है कि कानपुर की विरासत है यह लाल इमली मिल अब पहले वाले स्वरूप में दोबारा विकसित कर पाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि इस मामले को लोकसभा में भी उठाया गया है और प्रयास है कि आगे इस धरोहर लाल इमली के परिसर को युवाओं के रोजगार के लिए उपयोग में लाया जा सके।

यह भी पढ़ें - Kanpur: फीलखाना चौकी में देर रात हाईवोल्टेज ड्रामा, अमन अग्रवाल के छूटते ही भिड़े भाजपा-सपा नेता

सांसद के मुताबिक, कानपुर की दूसरी बंद मिलों को लेकर भी इसी तरह की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। पिछले दिनों इस संबंध में बैठक हुई है और आगे इसे एजेंडे में शामिल करने की बात कही गई है, वहीं श्रमिकों के बकाये भुगतान को लेकर भी आश्वासन दिया गया है। अब सवाल सिर्फ लाल इमली को फिर से चलाने का नहीं है, बल्कि यह है कि इस ऐतिहासिक परिसर को कानपुर के युवाओं के लिए रोजगार का नया केंद्र किस तरह बनाया जा सकता है।

Location :  Kanpur

Published :  18 September 2026, 6:53 PM IST

Advertisement