ग्रेटर नोएडा में 44 गांवों के किसानों ने प्राधिकरण पर बोला हल्ला, कहा- हमें हमारा हक दो, हाईकोर्ट का भी आदेश नहीं मान रहे अफसर

ग्रेटर नोएडा में वर्षों से लंबित एक मांग को लेकर 44 गांवों के किसान एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। किसानों का दावा है कि उनके पक्ष में आदेश और प्रस्ताव होने के बावजूद उन्हें अधिकार नहीं मिल रहे। आखिर किस बात को लेकर बढ़ रहा है यह असंतोष और आगे क्या होगा?

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 9 June 2026, 12:45 PM IST
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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के 44 गांवों के किसानों ने शेष 4 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड की मांग को लेकर प्राधिकरण कार्यालय पर मौन जुलूस और प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश और प्राधिकरण के बोर्ड प्रस्तावों के बावजूद उन्हें अब तक पूरा लाभ नहीं मिला है। प्रदर्शन के बाद किसानों ने ओएसडी को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है।

वर्षों पुरानी मांग को लेकर जुटे किसान

ग्रेटर नोएडा में मंगलवार को 44 गांवों के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण कार्यालय पर शांतिपूर्ण मौन जुलूस और प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने शासन और प्राधिकरण से शेष 4 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड जल्द आवंटित करने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि उन्हें वर्षों से उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है, जबकि इस संबंध में न्यायालय और प्राधिकरण स्तर पर कई निर्णय पहले ही लिए जा चुके हैं।

हाईकोर्ट के आदेश का हवाला

प्रदर्शन के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश और बाद में लिए गए विभिन्न प्रशासनिक एवं न्यायिक निर्णयों के तहत किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त प्रतिकर और 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड दिए जाने का प्रावधान किया गया था। उनका आरोप है कि अधिकांश किसानों को केवल 6 प्रतिशत विकसित भूखंड आवंटित किए गए, जबकि शेष 4 प्रतिशत भूखंड का मामला आज तक लंबित पड़ा हुआ है।

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बोर्ड बैठक में प्रस्ताव हुआ था पारित

किसानों ने बताया कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की 133वीं बोर्ड बैठक, जो 26 दिसंबर 2023 को आयोजित हुई थी, उसमें पात्र किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड देने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया था। इस प्रस्ताव को शासन की मंजूरी के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी के कारण हजारों किसान प्रभावित हो रहे हैं।

मौन जुलूस के जरिए जताया विरोध

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। मौन जुलूस में शामिल किसानों ने किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की, बल्कि अपने हाथों में मांगों से जुड़े बैनर और तख्तियां लेकर प्राधिकरण कार्यालय तक मार्च किया। किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि अपने वैधानिक अधिकारों की मांग करना है।

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ओएसडी को सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के ओएसडी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शासन स्तर पर लंबित प्रस्ताव को जल्द मंजूरी दिलाने और पात्र किसानों को शेष 4 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड आवंटित करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले का शीघ्र समाधान होना चाहिए।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि वर्षों से लंबित इस मुद्दे पर अब धैर्य जवाब दे रहा है। अगर शासन और प्राधिकरण ने समय रहते समाधान नहीं निकाला तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी।

किसानों ने दोहराई अधिकारों की मांग

प्रदर्शन में शामिल किसान नेता कपिल गुर्जर ने कहा कि वे केवल वही मांग रहे हैं, जो उन्हें न्यायालय के आदेशों और प्राधिकरण के प्रस्तावों के तहत मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार और प्राधिकरण को किसानों के साथ किए गए वादों को पूरा करना चाहिए, जिससे वर्षों से चले आ रहे इस विवाद का स्थायी समाधान हो सके।

Location :  Greater Noida

Published :  9 June 2026, 12:45 PM IST

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