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एसएसपी कार्यालय पर धरने के दौरान हंगामा, जाम और थाना प्रभारी को धमकी देने के मामले में भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत करीब 400 कार्यकर्ताओं के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर जांच में जुटी है।
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Muzaffarnagar: धरना, नारेबाजी और बैनर की आड़ में कानून को खुलेआम चुनौती देने का मामला सामने आया है। जिले में शनिवार को हुए प्रदर्शन के बाद हालात इस कदर बिगड़े कि सड़कें जाम हो गईं और थाना प्रभारी को वर्दी फाड़ने तक की धमकी दे दी गई। अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए भाकियू अराजनैतिक के बड़े नेताओं समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया।
भाकियू अराजनैतिक के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शनिवार को जिले के उद्योगों में कूड़ा-कचरा जलाने और संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक को ट्रांसपोर्टर का रंगदार बताए जाने के विरोध में एसएसपी कार्यालय पर धरना दिया था। प्रदर्शन के दौरान माइक और बैनर लगाए गए और नारेबाजी की गई। शुरुआत में धरना शांतिपूर्ण रहा, लेकिन धीरे-धीरे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
आरोप है कि जब सिविल लाइन थाना प्रभारी आशुतोष कुमार ने प्रदर्शनकारियों से बैनर हटाने को कहा तो धरने पर मौजूद कुछ वक्ता भड़क गए। इसी दौरान थाना प्रभारी को वर्दी फाड़ने की धमकी दी गई। इस घटनाक्रम का वीडियो किसी ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
धरने के दौरान कोर्ट रोड और झांसी रानी रोड पर लंबा जाम लग गया। जाम की वजह से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों तक यातायात बाधित रहा और पुलिस को स्थिति संभालने में मशक्कत करनी पड़ी।
रविवार को अधिकारियों के आदेश पर सिविल लाइन थाने में भाकियू अराजनैतिक के युवा प्रदेश अध्यक्ष बिजनौर निवासी दिगंबर सिंह, बुलंदशहर निवासी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मांगेराम त्यागी, मोहित और चरथावल ब्लॉक उपाध्यक्ष ठाकुर कुशल वीर सिंह को नामजद किया गया है। इनके साथ ही करीब 400 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई है।
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सिविल लाइन थाना प्रभारी की ओर से दर्ज कराई गई रिपोर्ट में धमकी देने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और जाम लगाने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।