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बदायूं जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बायो-एथेनॉल प्लांट में 12 मार्च को दिन-दहाड़े हुए डबल मर्डर से पूरे इलाके में सनसनी फैला गई थी। प्लांट के भीतर मीटिंग के दौरान डिप्टी जनरल मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता और मैनेजर हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
पीड़ित विनोद राठौर कई बार शिकायतें किये पर कोई कार्यवाही नहीं हुई
Budaun: बदायूं जिले के मूसाझाग थाना क्षेत्र में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बायो-एथेनॉल प्लांट में 12 मार्च को दिन-दहाड़े हुए डबल मर्डर से पूरे इलाके में सनसनी फैला गई थी। प्लांट के भीतर मीटिंग के दौरान डिप्टी जनरल मैनेजर सुधीर कुमार गुप्ता और मैनेजर हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि एक बड़े आपराधिक और सियासी नेटवर्क की परतें भी खोल दी हैं।
बताया जा रहा है कि 12 मार्च को दोपहर करीब एक बजे मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह उर्फ रामू अपने साथियों के साथ प्लांट में घुसा और मीटिंग के दौरान ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में दोनों अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल दातागंज CHC ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि अजय पहले प्लांट से जुड़ा वेंडर था, जिसे बाद में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इसी रंजिश के चलते उसने इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने अजय को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं।
इस केस में अजय का तहेरा भाई अभय अब पुलिस के निशाने पर है। जांच एजेंसियों का मानना है कि अभय इस पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी है। सूत्रों के मुताबिक उसका संबंध एक स्थानीय सियासी ‘आका’ से बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि अभय की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक संरक्षण और आपराधिक गठजोड़ के बड़े राज खुल सकते हैं।
गांव में अजय के परिवार का दबदबा लंबे समय से बताया जा रहा है। प्लांट के पास बने एक मकान को ग्रामीण ‘अय्याशी का अड्डा’ कहते हैं, जहां कथित तौर पर संदिग्ध गतिविधियां संचालित होती थीं। आरोप है कि यहीं बैठकर प्लांट से जुड़े फैसले, जमीन के सौदे और अन्य अवैध गतिविधियों की रणनीति बनाई जाती थी।
प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अजय और उसके रिश्तेदारों से जुड़े 11 अवैध निर्माणों पर बुलडोज़र चला दिया। ये निर्माण सरकारी जमीन पर बताए जा रहे हैं। साथ ही आवास योजना में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की भी जांच की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
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स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि औद्योगिक कॉरिडोर के नाम पर करीब 200 बीघा जमीन किसानों से दबाव बनाकर कम कीमत में ली गई। इस जमीन को एक ट्रस्ट के जरिए कब्जे में लेने की बात सामने आ रही है। हालांकि प्रशासन इस दावे की अलग से पुष्टि कर रहा है, लेकिन पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है।
घटना के बाद लापरवाही के आरोप में मूसाझाग थाना प्रभारी और एक सब-इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं जिले के पुलिस कप्तान का भी तबादला हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच SIT को सौंपी गई है, जबकि मृतकों के परिजन CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन असली सस्पेंस 'अभय' की गिरफ्तारी को लेकर बना हुआ है। माना जा रहा है कि उसके पकड़े जाने के बाद इस पूरे केस में सियासी संरक्षण, जमीन घोटाले और आपराधिक गठजोड़ की कई परतें खुल सकती हैं।