‘बस ऐप डाउनलोड करिए, कमाई शुरू हो जाएगी…’ ऐसे बिछाया गया 49 लाख की साइबर ठगी का जाल

एक फोन कॉल, मुनाफे का बड़ा वादा और फिर लाखों रुपये का गायब हो जाना। बरेली में सामने आए इस साइबर ठगी के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले राज खुलते गए। फर्जी ट्रेडिंग ऐप, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन और हवाला कनेक्शन की जानिये पूरी कहानी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 13 June 2026, 6:28 PM IST
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Bareilly: बरेली साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर ठग का पर्दाफाश किया है, जिसने शेयर मार्केट में एल्गो ट्रेडिंग के जरिए मोटे मुनाफे का लालच देकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी सचिन कुमार को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर निवेशकों से 49.43 लाख रुपये ठगने का आरोप है।

पुलिस की कार्रवाई में आरोपी के कब्जे से लैपटॉप, डेबिट कार्ड, चेकबुक, मोबाइल, मोहरें और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। साथ ही ठगी से जुड़े 31 लाख रुपये को होल्ड कराकर पीड़ित की रकम बचाने में भी सफलता मिली है।

WhatsApp लिंक से शुरू हुआ ठगी का जाल

मामले की शुरुआत तब हुई जब बरेली निवासी आलोक दुबे को एक कॉल प्राप्त हुई। कॉल करने वालों ने खुद को निवेश सलाहकार बताते हुए उन्हें एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करने की सलाह दी। इसके लिए WhatsApp पर लिंक भेजा गया और KYC प्रक्रिया पूरी कराई गई। इसके बाद जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच आलोक दुबे से अलग-अलग 20 ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 49 लाख 43 हजार 898 रुपये जमा कराए गए। निवेश पर भारी लाभ का भरोसा दिया गया और बाद में 15 प्रतिशत कमीशन तथा 18 प्रतिशत जीएसटी के नाम पर भी अतिरिक्त रकम वसूली गई।

जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो कभी ऑडिट का बहाना बनाया गया, तो कभी ऐप अपडेट होने की बात कहकर उसे टाल दिया गया।

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जांच में सामने आया पूरा नेटवर्क

शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल की जांच के दौरान मुख्य आरोपी सचिन कुमार का नाम सामने आया। लगातार निगरानी के बाद पुलिस टीम ने 12 जून 2026 को देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित विश्वनाथ एन्क्लेव क्षेत्र से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

फर्जी ऐप और वेबसाइट बनाकर करता था ठगी

पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि उसने निवेशकों को फंसाने के लिए SMC Broking और Start Investment के नाम से फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तैयार किए थे। लोगों को ऊंचे रिटर्न का लालच देकर पैसे जमा कराए जाते थे। जैसे ही निवेश की राशि बढ़ती, संबंधित आईडी निष्क्रिय कर दी जाती और संपर्क समाप्त कर दिया जाता था।

क्रिप्टो और हवाला के जरिए छिपाता था रकम

जांच में सामने आया कि आरोपी ठगी की रकम को सीधे इस्तेमाल नहीं करता था। वह पहले धनराशि को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में बदलता था। इसके बाद रकम को डिजिटल वॉलेट में USDT के रूप में ट्रांसफर किया जाता और फिर हवाला नेटवर्क के जरिए नकद में निकाला जाता था। इस तरीके से आरोपी साइबर जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने का प्रयास करता था।

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पहचान छिपाने के लिए बदलता था पता

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों और दस्तावेजों के लिए बार-बार आधार कार्ड का पता बदलवाता था। किरायानामा और शपथपत्र के जरिए नए पते तैयार कर पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी। जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी के खिलाफ तेलंगाना और कर्नाटक में भी साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतें दर्ज हैं।

कई महत्वपूर्ण सामान बरामद

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 8 डेबिट कार्ड, 8 चेकबुक, लैपटॉप, मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासबुक, डिपॉजिट स्लिप, मोहरें, जियो राउटर समेत कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं, जो ठगी के नेटवर्क को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पहले से दर्ज धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के अलावा अन्य गंभीर धाराएं भी जोड़ दी हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

Location :  Bareilly

Published :  13 June 2026, 6:28 PM IST

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