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नोएडा से 34 किमी दूर भीषण हादसा (Img- X)
Noida News: नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए दर्दनाक बस अग्निकांड ने एक बार फिर यात्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्लीपर बस में लगी भीषण आग में नौ यात्रियों की मौत के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर बार-बार हो रही बस दुर्घटनाओं के बावजूद सुरक्षा मानकों को लागू करने में लापरवाही क्यों बरती जा रही है। मामले में हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने की। कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत हुई थी। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव परिवहन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट के सामने पेश हुए। अधिकारियों ने हादसे के बाद की गई कार्रवाई और जांच की जानकारी अदालत को दी।
मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि रात के समय चलने वाली बसों की सुरक्षा जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा बसों के निर्धारित स्थानों पर रुकने, फिटनेस और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच की जाएगी। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगर किसी बस में सुरक्षा नियमों की अनदेखी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने कहा कि लापरवाही सामने आने पर चालक, परिचालक और बस संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पहले हुई बस आग की घटनाओं का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने जुलाई 2023 में रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर हुई घटना, नवंबर 2024 में कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे हादसे और दिसंबर 2025 में यमुना एक्सप्रेसवे के मथुरा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हुई घटना का जिक्र किया।
सुनवाई में बसों के तकनीकी सुरक्षा मानकों पर भी चर्चा हुई। न्यायमित्र और कोर्ट के शोध सहयोगियों ने बताया कि बसों के लिए AIS-052, AIS-119 और AIS-135 जैसे सुरक्षा मानक लागू हैं। इन मानकों में आपातकालीन निकास, स्लीपर कोच की डिजाइन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियम शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर दुर्घटनाग्रस्त बस ने निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया था तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पिछले तीन वर्षों में जारी किए गए बस परमिट, वाहनों की जांच प्रक्रिया, सीमा जांच चौकियों की स्थिति, यात्री सुरक्षा जांच और की गई आपराधिक कार्रवाई का विस्तृत हलफनामा मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी। कोर्ट की नजर इस बात पर है कि सरकार बस यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाती है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
Location : Noida
Published : 26 September 2026, 5:26 PM IST
Topics : Allahabad High Court Noida Bus Fire Accident Road Accident UP Transport Department Yamuna Expressway