Tech News: WhatsApp वॉइस नोट से लग सकेगा डिप्रेशन का पता? साइंटिस्ट्स ने बनाया नया AI मॉडल

WhatsApp वॉइस नोट से अब डिप्रेशन की पहचान संभव है। वैज्ञानिकों ने ऐसा AI मॉडल बनाया है जो आवाज के आधार पर मेंटल हेल्थ का विश्लेषण करता है। रिसर्च में महिलाओं में 92% तक सटीकता सामने आई है। जानिए पूरी जानकारी।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 26 January 2026, 12:30 PM IST
google-preferred
1 / 7 \"Zoom\"अब आपके WhatsApp पर भेजे गए वॉइस नोट सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रहेंगे, बल्कि ये आपकी मेंटल हेल्थ के बारे में भी अहम संकेत दे सकते हैं। सुनने में भले ही यह हैरान करने वाला लगे, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक ऐसा AI मॉडल विकसित किया है, जो सिर्फ इंसान की आवाज सुनकर डिप्रेशन के लक्षण पहचान सकता है। इस चौंकाने वाली तकनीक से जुड़ी रिसर्च हाल ही में PLOS Mental Health जर्नल में प्रकाशित हुई है। (Img Source: Google)
2 / 7 \"Zoom\"इस रिसर्च के मुताबिक, यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर इंसान की मानसिक स्थिति का विश्लेषण करता है और काफी हद तक सटीक नतीजे देता है। खास बात यह है कि इसके लिए किसी लंबी टेस्ट प्रक्रिया या सवाल-जवाब की जरूरत नहीं होती, बल्कि सिर्फ एक सामान्य वॉइस रिकॉर्डिंग ही काफी है। (Img Source: Google)
3 / 7 \"Zoom\"ब्राजील के रिसर्चर विक्टर एच. ओ. ओटानी के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में सामने आया कि यह AI मॉडल महिलाओं में डिप्रेशन की पहचान लगभग 92 प्रतिशत सटीकता के साथ कर लेता है। वहीं पुरुषों के मामले में इसकी सटीकता करीब 75 प्रतिशत रही। (Img Source: Google)
4 / 7 \"Zoom\"रिसर्च में बताया गया कि AI को सिर्फ एक छोटी सी ऑडियो क्लिप चाहिए, जिसमें व्यक्ति अपने रोजमर्रा के काम, दिनचर्या या सामान्य बातचीत के बारे में बोल रहा हो। दरअसल, डिप्रेशन की स्थिति में इंसान की बोलने की गति, आवाज की पिच और एनर्जी लेवल में बदलाव आ जाता है। ये बदलाव इंसानी कानों को तुरंत महसूस नहीं होते, लेकिन AI एल्गोरिदम इन्हें आसानी से पकड़ लेता है। (Img Source: Google)
5 / 7 \"Zoom\"यह AI मॉडल आवाज के कई पैमानों पर काम करता है, जैसे बोलने की स्पीड, आवाज का उतार-चढ़ाव, शब्दों के बीच का ठहराव और ऊर्जा और भावनात्मक टोन डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति की आवाज अक्सर धीमी, सपाट और कम ऊर्जा वाली हो जाती है। AI इन्हीं पैटर्न्स को पहचानकर संभावित मानसिक तनाव की ओर इशारा करता है। (Img Source: Google)
6 / 7 \"Zoom\"इस टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह सस्ता और आसान स्क्रीनिंग टूल बन सकती है। खासकर उन देशों और इलाकों में जहां मनोवैज्ञानिक या मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स की कमी है या इलाज बहुत महंगा है। आज के समय में पूरी दुनिया में डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन संसाधन सीमित हैं। ऐसे में यह AI सिस्टम शुरुआती स्तर पर डिप्रेशन की पहचान कर सकता है, जिससे समय रहते व्यक्ति को सही इलाज की ओर बढ़ाया जा सके। (Img Source: Google)
7 / 7 \"Zoom\"रिसर्चर्स साफ तौर पर कहते हैं कि यह तकनीक डॉक्टरों या साइकोलॉजिस्ट की जगह नहीं ले सकती। लेकिन यह एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम बन सकती है, जो शुरुआती जांच में मदद करे। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें व्यक्ति को असहज सवालों का सामना नहीं करना पड़ता, बस एक सामान्य वॉइस नोट रिकॉर्ड करना होता है। भविष्य में ऐसी तकनीक WhatsApp, कॉल रिकॉर्डिंग या हेल्थ ऐप्स के जरिए मेंटल हेल्थ अवेयरनेस को नई दिशा दे सकती है। (Img Source: Google)

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 26 January 2026, 12:30 PM IST

Advertisement
Advertisement