Microwave vs OTG: खाना जल्दी भी बने और किचन गर्म भी न हो, जानिए कौन है बेस्ट ऑप्शन

गर्मियों में खाना बनाते समय किचन की बढ़ती गर्मी बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसे में माइक्रोवेव और ओटीजी में कौन बेहतर है, इसे लेकर लोगों में काफी कन्फ्यूजन रहता है। जानिए कौन सा अप्लायंस कम गर्मी फैलाता है, बिजली बचाता है और गर्मियों में ज्यादा सुविधाजनक साबित होता है।

Updated : 29 May 2026, 12:25 PM IST
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New Delhi: गर्मियों के मौसम में किचन में कुछ देर खड़े होकर खाना बनाना भी मुश्किल हो जाता है। गैस स्टोव की गर्मी से रसोई का तापमान तेजी से बढ़ता है और लंबे समय तक खाना बनाना परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसे में अब लोग माइक्रोवेव और ओटीजी जैसे किचन अप्लायंसेज को सिर्फ सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि इस नजर से भी देखने लगे हैं कि कौन सा उपकरण कम गर्मी पैदा करता है और बिजली की बचत करता है। नौतपा और भीषण गर्मी के दौरान यह सवाल और अहम हो जाता है कि माइक्रोवेव बेहतर है या ओटीजी।

माइक्रोवेव कैसे करता है काम?

माइक्रोवेव इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स की मदद से खाना गर्म करता है। यह खाने में मौजूद पानी और फैट के मॉलिक्यूल्स को तेजी से वाइब्रेट करता है, जिससे खाना अंदर से गर्म होने लगता है। यही वजह है कि माइक्रोवेव इस्तेमाल करने के दौरान आसपास की हवा ज्यादा गर्म नहीं होती।

माइक्रोवेव की बाहरी बॉडी भी अपेक्षाकृत कम गर्म होती है और छोटे-छोटे काम कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं। खाना गर्म करना, सब्जियां स्टीम करना या इंस्टेंट मील तैयार करना इसमें आसान और तेज माना जाता है। गर्मियों में यह सुविधा लोगों को काफी राहत देती है क्योंकि इससे किचन का तापमान ज्यादा नहीं बढ़ता।

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ओटीजी क्यों बढ़ा देता है किचन की गर्मी?

ओटीजी यानी ओवन टोस्टर ग्रिलर पारंपरिक ओवन की तरह काम करता है। इसमें इलेक्ट्रिक हीटिंग रॉड्स लगी होती हैं, जो काफी ज्यादा गर्म होकर पूरे चैम्बर में ड्राई हीट फैलाती हैं। बेकिंग और ग्रिलिंग के दौरान ओटीजी लंबे समय तक 150 से 250 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान बनाए रखता है।

इसी वजह से ओटीजी का ग्लास डोर, मेटल बॉडी और उसके आसपास की हवा भी गर्म होने लगती है। अगर लंबे समय तक केक, कुकीज या ग्रिल्ड फूड बनाया जाए तो कुछ ही देर में किचन काफी गर्म महसूस होने लगता है। गर्मियों में लगातार ओटीजी इस्तेमाल करना असहज हो सकता है।

कुकिंग टाइम बनाता है बड़ा अंतर

माइक्रोवेव और ओटीजी के बीच सबसे बड़ा फर्क उनकी हीटिंग टेक्नोलॉजी के साथ-साथ कुकिंग टाइम का भी है। ओटीजी इस्तेमाल करने से पहले आमतौर पर 10 से 15 मिनट तक प्री-हीटिंग करनी पड़ती है। इसके बाद खाना पकाने में 20 से 45 मिनट तक का समय लग सकता है।

वहीं माइक्रोवेव में प्री-हीटिंग की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें खाना गर्म करने या जल्दी कुछ पकाने का काम 2 से 10 मिनट में पूरा हो जाता है। कम समय तक इस्तेमाल होने की वजह से माइक्रोवेव किचन में कम गर्मी फैलाता है और गर्मियों में ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है।

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किससे ज्यादा आता है बिजली बिल?

कई लोग सिर्फ वॉट देखकर बिजली की खपत का अंदाजा लगाते हैं, लेकिन असली फर्क इस बात से पड़ता है कि उपकरण कितनी देर तक चलता है। माइक्रोवेव आमतौर पर 1200 से 1400 वॉट तक बिजली खपत करता है, लेकिन यह कुछ मिनटों के लिए ही चलता है।

दूसरी तरफ ओटीजी का वॉटेज कई बार कम होता है, लेकिन यह 30 से 60 मिनट तक लगातार चलता रहता है। ऐसे में रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए माइक्रोवेव ज्यादा एनर्जी एफिशिएंट माना जाता है। वहीं लंबे बेकिंग और ग्रिलिंग सेशन में ओटीजी ज्यादा बिजली खर्च कर सकता है। इसके अलावा ओटीजी से निकलने वाली अतिरिक्त गर्मी की वजह से एसी और कूलर पर भी ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

फिर भी ओटीजी क्यों है जरूरी?

हालांकि गर्मियों में माइक्रोवेव ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन ओटीजी की सबसे बड़ी खासियत फूड टेक्सचर है। माइक्रोवेव खाना जल्दी गर्म कर देता है, लेकिन कई बार खाना नरम या थोड़ा रबर जैसा महसूस हो सकता है। वहीं ओटीजी ड्राई हीट की मदद से खाने को क्रिस्पी और ब्राउन टेक्सचर देता है। इसी कारण बेकिंग, ग्रिलिंग और टोस्टिंग के लिए आज भी ओटीजी को बेहतर विकल्प माना जाता है।

Location :  New Delhi

Published :  29 May 2026, 12:25 PM IST

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