मैं अनशन खत्म कर दूंगा, लेकिन… सोनम वांगचुक की नई शर्तों ने खड़े किए बड़े सवाल, अस्पताल से आए बयान ने बदला पूरे आंदोलन का रुख

सोनम वांगचुक ने अस्पताल से अनशन खत्म करने के लिए तीन नई शर्तें रखीं तो पूरा मामला नई बहस में बदल गया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि उनकी पुरानी प्रमुख मांग अब शर्तों में क्यों नहीं दिखी।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 20 July 2026, 8:54 PM IST
google-preferred

New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक नए बयान आंदोलन को नई दिशा में मोड़ दिया है। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अनशन खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखीं। इन शर्तों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई और कई पत्रकारों, शिक्षाविदों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाने शुरू कर दिए।

अस्पताल में भर्ती, फिर भी बोले- अनशन जारी है

18 जुलाई को पुलिस दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। अस्पताल पहुंचने के बाद उन्होंने ड्रिप और मुंह से किसी भी तरह का तरल पदार्थ लेने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उनका अनशन जारी रहेगा और वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, सोमवार को किए गए उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने चर्चा का नया विषय खड़ा कर दिया।

ये भी पढ़ें- CJP Protest: ‘प्रदर्शन में शामिल बेटियों-बहनों के कपड़े फाड़े गये, प्राइवेट ड्रेस वाले लोग कौन थे’? अखिलेश यादव के बड़े आरोप

क्या हैं अनशन खत्म करने की तीन शर्तें?

सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था की हाल की नाकामियों, जैसे प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है, या राजनीतिक दल संसद में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने का भरोसा देते हैं, अथवा विभिन्न दलों के सांसद और नेता अस्पताल आकर उन्हें इस संबंध में आश्वासन देते हैं, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।

ये भी पढ़ें- आखिर कैसे जंतर-मंतर का छोटा सा धरना बन गया देश का सबसे बड़ा युवा आंदोलन?

यहीं से विवाद शुरू हुआ, क्योंकि उनकी इन शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का कोई उल्लेख नहीं था।

सबसे ज्यादा सवाल इसी बदलाव पर

वांगचुक का आंदोलन शुरुआत से ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग पर केंद्रित रहा है। ऐसे में कई लोगों को यह बात हैरान कर रही है कि अब उनकी नई शर्तों में पहले की प्रमुख मांग नजर नहीं आ रही। इसी वजह से सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या आंदोलन की दिशा बदल गई है या फिर रणनीति में कोई नया मोड़ आया है।

Location :  New Delhi

Published :  20 July 2026, 8:54 PM IST

Related News

Advertisement