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प्रयागराज: हंडिया में किशोरी के अपहरण और पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने टोल प्लाजा मैनेजर के झूठे बयान के आधार पर तीन आरोपियों को क्लीन चिट दे दी। यह बात मैनेजर द्वारा दिए गए हलफनामे में सामने आई, जिसमें उसने स्पष्ट किया कि वह न तो किसी से मिला और न ही कोई बातचीत की। इसके बाद पीड़िता की मां ने उच्चाधिकारियों से न्याय की मांग की। पीड़िता की मां ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के मुताबिक 2 फरवरी 2025 को इन तीनों आरोपियों को क्लीन चिट दे दी गई और जांच बंद कर दी गई। पीड़िता की मां ने इस पर सवाल उठाते हुए पुलिस पर आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने पैसे लेकर मामले को दबाने की कोशिश की और दबाव बनाकर उनकी दुकान हटवाने की कोशिश की।
पूरा मामला इस प्रकार था पीड़िता की मां ने बताया कि उनका परिवार हंडिया टोल प्लाजा के पास किराए के मकान में रहता है और वह अपने पति के साथ दुकान चलाती थीं। 25 अक्टूबर 2024 की रात करीब दो बजे झूंसी निवासी जीशान उनकी 15 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया। इसके बाद हंडिया पुलिस ने जीशान के खिलाफ पॉक्सो एक्ट, अपहरण और छेड़छाड़ के तहत केस दर्ज किया था। कुछ दिन बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद कर लिया था। 16 नवंबर 2024 को किशोरी ने कोर्ट को बताया कि जीशान ने उसे जबरन कार में बैठाने की कोशिश की थी और इस दौरान उसके साथ तीन अन्य लड़के सूर्यप्रताप सिंह, आशुतोष तिवारी और बलवंत सिंह भी थे। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों लड़कों के नाम भी विवेचना में शामिल कर लिए। हालांकि 18 दिसंबर 2024 को सिर्फ जीशान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई, जबकि बताया गया कि अन्य तीन के मामले में जांच चल रही है।
Published : 19 March 2025, 5:58 PM IST
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