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लखनऊ: लंबे समय से मेरठ जोन को एक गिरोह के रुप में चलाने वाले 1990 बैच के आईपीएस प्रशांत कुमार की कार्यप्रणाली की एक-एक कर कलई खुल रही है। 12 बजे की घटना को रात 8 बजे तक पचा कर रखा जाता है कि बुलंदशहर हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत आखिर हुई तो हुई कैसे..
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ड्राइवर ने बतायी तांडव की कहानी
दोपहर से ही वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कैसे पुलिस की जीप की ड्राइविंग सीट पर शहीद इंस्पेक्टर नीटे की ओर लटके हुए हैं। सुबोध के ड्राइवर रामाश्रय सहित मौके पर मौजूद तमाम पुलिस वाले कह रहे हैं कि इंस्पेक्टर को सिर में गोली मारी गयी है.. तमाम उपद्रवी चिल्ला-चिल्ला कर यह कह रहे हैं लेकिन एडीजी प्रशांत कुमार ने न जाने किस साजिश के तहत इस मामले को लेकर मातहतों को मुंह तक न खोलने की चेतावनी दे डाली और खुद लखनऊ को गुमराह करने में जुटे गये कि इंस्पेक्टर पत्थरबाजी का शिकार हुए हैं।
पत्रकारों से भी छिपाते रहे सच
जब एडीजी बुलंदशहर में पत्रकारों के सामने पहुंचे तो यहां भी उन्होंने झूठ बोला और जब पत्रकारों ने सवाल-जवाब किये तो किसी तरह गिरते-पड़ते बोले कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में और जांच से चलेगा कि मौत कैसे हुई.. गोली लगी या नही? बड़ा सवाल यह है कि क्यों आखिर एडीजी ने शुरु से एक बात क्यों नही कही कि जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत कैसे हुई? क्यों उन्होंने मौत का प्रथमदृष्टया कारण पत्थरबाजी बता डाला। क्यों आखिर उनकी बातों में विरोधाभास रहा?
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क्या इंस्पेक्टर की रिवाल्वर से ही मारी गयी गोली?
डाइनामाइट न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक छीना-झपटी के दौरान उपद्रवियों ने शहीद इंस्पेक्टर की रिवाल्वर छीन ली और उसी से उन्हें गोली मार दी लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये सच सामने लाया जायेगा? जो पुलिस अफसर पहले ये मानने को ही नही तैयार थे कि सुबोध को गोली मारी गयी वे इस बात को जांच में सामने आने देंगे कि इंस्पेक्टर की मौत उपद्रवियों के कट्टे या बंदूक से नही बल्कि सरकारी पिस्टल से कर दी गयी।
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पोस्टमार्टम में हुआ खुलासा
डाक्टरी पोस्टमार्टम में खुलासा हुआ है कि इंस्पेक्टर को काफी नजदीक से .32 बोर की रिवाल्वर से बायीं आंख के पास गोली मारी गयी है।
संदेह के घेरे में जांच अधिकारी
अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बदनाम एडीजी प्रशांत कुमार की सेटिंग लखनऊ में किस कदर बोलती है इसकी बानगी ये है कि घटना की जांच के लिए जो एसआईटी गठित की गयी है उसके मुखिया प्रशांत के मातहत और मेरठ के आईजी रामकुमार हैं। ये वही रामकुमार हैं जिनके कारनामे इनके बॉस की तरह बोलते हैं। कुछ दिन पहले ही इंस्पेक्टर परशुराम और इंस्पेक्टर योगेंद्र कुमार का एक चैट वायरल हुआ था जिसमें लेन-देन के दम पर ट्रांसफर-पोस्टिंग की राम-कहानी थी।
प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी
क्या सूबे के प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी के लिए ये बेहतर नही होता कि इस घटना की जांच मेरठ जोन के किसी अफसर को न सौंपी जाती। वे किस मुंह से अपना दोष स्वीकारेंगे?
गजब के हैं कलाकार
ज्यादा दिन नही हुआ जब मेरठ जोन के अंतर्गत आने वाले शामली जिले में पुलिसिया जीप डायल-100 से खींचकर एक युवक को मौत के घाट उतार दिया गया था तब भी गजब की कलाकारी दिखायी थी एडीजी प्रशांत कुमार ने। अब एसआईटी की जांच को अपने मातहत आईजी को दिलाकर उन्होंने यह सुनिश्चित कर लिया है कि जांच की रिमोट उनके ही हाथ में होगी और वे जिसे.. जैसे चाहेंगे.. गुमराह करेंगे।
Published : 3 December 2018, 8:59 PM IST
Topics : bulandshahr violence इंस्पेक्टर एडीजी प्रशांत कुमार बुलंदशहर मेरठ मौत शहीद सुबोध कुमार सिंह हिंसा
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