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वैभव और सचिन तेंदुलकर (IMG: IANS)
New Delhi: क्रिकेट के मैदान पर रिकॉर्ड टूटने से पहले अक्सर आखिरी कुछ रन सबसे ज्यादा भारी पड़ते हैं। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने सेंट्रल जोन के खिलाफ बल्ले से ऐसा तूफान मचाया कि एक वक्त लगा महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का 36 साल पुराना रिकॉर्ड अब टूटने वाला है। वैभव तेजी से शतक की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन 92 रन के स्कोर पर उनका विकेट गिर गया। यानी इतिहास बदलने के लिए उन्हें सिर्फ 8 रन और चाहिए थे।
ईस्ट जोन की ओर से बल्लेबाजी करने उतरे वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही अपना इरादा साफ कर दिया था। उन्होंने सेंट्रल जोन के गेंदबाजों को संभलने का ज्यादा मौका नहीं दिया और लगातार आक्रामक शॉट खेलते रहे। महज 81 गेंदों में 92 रन की पारी इस बात का सबूत है कि वैभव ने कितनी तेजी से रन बनाए। उनकी पारी में 7 चौके और 7 लंबे छक्के शामिल रहे। यानी बाउंड्री के जरिए ही उन्होंने 70 रन बटोर लिए। मैदान के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए उनके शॉट देखकर ऐसा लग रहा था कि 15 साल का यह बल्लेबाज किसी बड़े रिकॉर्ड को अपने नाम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम है। सचिन ने 1990 में 17 साल और 262 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में शतक लगाया था। यह रिकॉर्ड करीब 36 साल से कायम है। वैभव सूर्यवंशी के पास इसे तोड़ने का बेहद शानदार मौका था। वैभव महज 15 साल की उम्र में यह मुकाबला खेल रहे हैं। अगर वह सेंट्रल जोन के खिलाफ 100 रन पूरे कर लेते तो वह सचिन से काफी कम उम्र में दलीप ट्रॉफी शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन जाते।
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वैभव ने ईस्ट जोन के कप्तान और अनुभवी सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन के साथ पारी की शुरुआत की। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 100 से ज्यादा रनों की शानदार साझेदारी की। इस साझेदारी ने ईस्ट जोन को मजबूत शुरुआत दिलाई। अभिमन्यु ईश्वरन ने जहां पारी को संभालने का काम किया, वहीं वैभव ने तेजी से रन बनाकर विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा।
सचिन का रिकॉर्ड तोड़ने से चूके वैभव खाली हाथ नहीं लौटे। उन्होंने इसी पारी के दौरान एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वैभव ने महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। 15 साल और 157 दिन की उम्र में वह दलीप ट्रॉफी इतिहास में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। इसके साथ ही उन्होंने सबसे तेज अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था। लक्ष्मण सिंह ने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था। करीब 57 साल बाद वैभव ने इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
वैभव की बल्लेबाजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी 92 रन की पारी में सात छक्के लगाए। इसके अलावा सात चौके भी उनके बल्ले से निकले। 15 साल की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट के बड़े मुकाबले में इस तरह की आक्रामक बल्लेबाजी अपने आप में खास है। वैभव ने कई मौकों पर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाया।
वैभव सूर्यवंशी के लिए यह पारी एक साथ खुशी और निराशा दोनों लेकर आई। खुशी इसलिए क्योंकि उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र और सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। निराशा इसलिए क्योंकि वह शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए। अगर वह उन 8 रनों को बना लेते तो दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में शतक लगाने का रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर से छीन लेते। फिलहाल सचिन का नाम इस रिकॉर्ड पर कायम है। लेकिन वैभव ने जिस अंदाज में 92 रन बनाए, उससे साफ है कि वह बड़े रिकॉर्ड्स की दौड़ में शामिल हो चुके हैं। महज 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू टूर्नामेंट में रिकॉर्ड बनाना बताता है कि इस युवा बल्लेबाज में कितनी क्षमता है।
Location : New Delhi
Published : 31 August 2026, 2:03 PM IST