पोलियो और गरीबी भी नहीं रोक पाई… झंडू कुमार ने रचा इतिहास, संघर्षों को हराकर भारत को दिलाया पहला पदक

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के पहले पदक के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जिसने हर किसी को प्रेरित कर दिया। बिहार के झंडू कुमार ने मुश्किल हालात, बीमारी और आर्थिक परेशानियों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 25 July 2026, 8:58 PM IST
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New Delhi: राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत गांव के रहने वाले झंडू ने अपनी मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना करना भी कभी आसान नहीं था।

पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। उन्होंने प्रतियोगिता में 130.9 अंक हासिल किए। झंडू ने 181 किलोग्राम और 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया, जबकि 196 किलोग्राम का अंतिम प्रयास पूरा नहीं हो सका। इस मुकाबले में नाइजीरिया के इदरीस रिलवान ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने रजत पदक अपने नाम किया।

बचपन में मिली चुनौती

झंडू कुमार की जिंदगी शुरुआत से ही संघर्षों से भरी रही। महज पांच साल की उम्र में पोलियो की वजह से उनके शरीर को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी। घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने के लिए उन्हें माता-पिता के साथ सब्जी बेचने का काम करना पड़ा। कई बार वह गांव से बाजार तक लंबा सफर तय करते थे। उस समय उनके पास व्हीलचेयर जैसी जरूरी सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी।

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लेकिन हालात चाहे कितने भी कठिन रहे हों, झंडू ने अपने अंदर के खिलाड़ी को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया।

वेट ट्रेनिंग से शुरू हुआ सफर

साल 2010 से 2012 के बीच झंडू कुमार ने अपनी फिटनेस बेहतर करने के लिए वेट ट्रेनिंग शुरू की थी। शुरुआत में उनका उद्देश्य सिर्फ शरीर को मजबूत बनाना था। धीरे-धीरे उन्होंने शॉट पुट और भाला फेंक जैसे खेलों में भी अपनी किस्मत आजमाई। लेकिन आखिरकार उन्हें पैरा पावरलिफ्टिंग में अपनी असली पहचान मिली। इस खेल में उन्होंने लगातार मेहनत की और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाई।

आर्थिक मुश्किलों के बीच भी जारी रखा अभ्यास

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को बेहतर डाइट और सुविधाओं की जरूरत होती है, लेकिन झंडू के लिए यह भी आसान नहीं था। रोजगार के लिए उन्होंने दोस्तों से मदद लेकर ई-रिक्शा खरीदा, जिससे परिवार का खर्च चल सके। हालांकि कोरोना महामारी के दौरान यह काम भी प्रभावित हुआ। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभ्यास को नहीं छोड़ा और लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा। उनकी मेहनत का नतीजा अब पूरी दुनिया के सामने है।

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कोच ने बताया बड़ी उपलब्धि

झंडू कुमार की सफलता पर उनके कोच राजिंदर सिंह रहलू ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के पदकों की शुरुआत करना बेहद खास पल है। वहीं भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग के राष्ट्रीय कोच जितेंद्र पाल सिंह ने बताया कि यह खेल सबसे कठिन पैरा खेलों में से एक है। उनके अनुसार, इस स्तर पर पदक जीतना खिलाड़ी की क्षमता और मेहनत को साबित करता है।

Location :  New Delhi

Published :  25 July 2026, 8:58 PM IST

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