DN Exclusive: अंतिम क्षण में महात्मा गांधी दिल्ली क्यों आए थे? जानें क्या है पूरी कहानी

महात्मा गांधी ने अपने जीवन के आखिरी महीने दिल्ली में क्यों बिताए? सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि आज़ादी के बाद पूरा देश विभाजन की आग में जल रहा था। पंजाब और दिल्ली में दंगे, हिंसा और खूनखराबा से हालात बेहद डरावने थे। पढ़ें पूरी खबर

Updated : 2 October 2025, 7:52 PM IST
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नई दिल्ली:  2 अक्टूबर का दिन हर भारतीय के लिए बेहद खास है। भारत की आज़ादी के सपने को साकार करने वाले महात्मा गांधी का जन्म इसी दिन हुआ था। ऐसे में आज हम बात करेंगें महात्मा गांधी ने अपने जीवन के आखिरी महीने दिल्ली में क्यों बिताए? सवाल इसलिए भी अहम है, क्योंकि आज़ादी के बाद पूरा देश विभाजन की आग में जल रहा था। पंजाब और दिल्ली में दंगे, हिंसा और खूनखराबा से हालात बेहद डरावने थे। इन्हीं हालात को काबू करने के लिए गांधी 9 सितंबर 1947 को कोलकाता से दिल्ली आए। गांधी का मानना था कि अगर दिल्ली का माहौल शांत हो जाएगा तो पूरे देश में अमन कायम हो सकेगा। इसी वजह से वे अपनी उम्र और स्वास्थ्य की परवाह किए बिना दिल्ली आए और बिरला हाउस में ठहरे।

आखिरी महीने दिल्ली में क्यों ?
दिल्ली में उन्होंने उपवास रखा, शरणार्थियों से मुलाकात की, हिंदू-मुस्लिम नेताओं को साथ बैठाया और लोगों से हिंसा छोड़ भाईचारे की अपील की।  उनका संदेश साफ था -हिंदू और मुसलमान साथ रहेंगे तो ही भारत का भविष्य सुरक्षित होगा। लेकिन, अफसोस यही दिल्ली गांधी की अंतिम तपोभूमि बनी। 30 जनवरी 1948 को, इसी बिरला हाउस में, नाथूराम गोडसे की गोली ने राष्ट्रपिता का जीवन छीन लिया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म
महात्मा गांधी अहिंसा और सत्य को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। गांधीजी ने इंग्लैंड में कानून की पढ़ाई की और फिर दक्षिण अफ्रीका में वकालत करते हुए नस्लवाद का सामना किया। यहीं उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा का मार्ग अपनाया। भारत लौटकर, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व किया -1917 में चंपारण सत्याग्रह,  920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में दांडी मार्च (या नमक सत्याग्रह), और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन।
इन आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को एक जन आंदोलन में बदल दिया। 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने उनकी हत्या कर दी, लेकिन गांधी का संदेश अमर है। दुनिया उन्हें शांति और अहिंसा का प्रतीक मानती है। संयुक्त राष्ट्र भी उनके जन्मदिन, 2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है। इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस घोषित किया गया है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 2 October 2025, 7:52 PM IST

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