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प्रतीकात्मक छवि (सोर्स- Pinterest)
New Delhi: वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार (Main Gate) को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। आमतौर पर लोग केवल चार मुख्य दिशाओं के आधार पर ही मुख्य द्वार का चयन करते हैं, लेकिन वास्तु विज्ञान इससे कहीं अधिक गहरा है। वास्तु नियमों के अनुसार, हमारे घर में प्रवेश करने के लिए कुल 32 संभावित प्रवेश द्वार होते हैं।
ये सभी 32 द्वार अलग-अलग दिशा क्षेत्रों में विभाजित होते हैं और इनमें से प्रत्येक द्वार का प्रभाव और परिणाम एक समान नहीं होता। इन्हीं 32 द्वारों में से दो प्रमुख द्वार हैं सूर्य और सत्य। वास्तु में इन दोनों ही द्वारों को बहुत अधिक अनुकूल नहीं माना जाता है।
प्रसिद्ध इंटीरियर वास्तु प्लानर और कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल (Interior Vastu Planner & Consultant Rani Tiberwal) के अनुसार, घर के निर्माण या चयन के समय इन दो दिशाओं के मुख्य द्वार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। वास्तु विज्ञान में सूर्य नामक प्रवेश द्वार को अच्छा नहीं माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में मुख्य द्वार होने से घर के सदस्यों के स्वभाव में अचानक बदलाव आने लगता है।
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ऐसे घर में रहने वाले लोगों में अत्यधिक गुस्सा, तनाव और चिड़चिड़ापन देखा जाता है, जिससे परिवार की सुख-शांति प्रभावित होती है। ठीक इसी तरह, सत्य नामक प्रवेश द्वार का परिणाम भी लगभग सूर्य द्वार के समान ही होता है। इस दिशा से भी घर में आने वाली ऊर्जा जातकों के व्यवहार में उग्रता बढ़ाती है।
यदि आपके घर का मुख्य द्वार भी अनजाने में सूर्य या सत्य दिशा क्षेत्र में बन गया है, तो डरने या तोड़-फोड़ करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। वास्तु शास्त्र में इसके लिए बेहद सरल और प्रभावी उपाय बताया गया है। इस दोष को दूर करने के लिए आपको अपने घर के मुख्य द्वार (Main Gate) पर एक 'सूर्य यंत्र' की स्थापना करनी चाहिए।
मुख्य गेट पर विधि-विधान से सूर्य यंत्र लगाने पर सूर्य और सत्य दिशा से उत्पन्न होने वाले नकारात्मक प्रभाव और दोष समाप्त हो जाते हैं। यह यंत्र घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य स्थापित कर गुस्से और चिड़चिड़ेपन को कम करने में मदद करता है।
Location : New Delhi
Published : 30 June 2026, 1:52 PM IST