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घर के मंदिर का धार्मिक और वास्तु महत्व (Img- Pinterest)
New Delhi: भारतीय परंपरा और वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर का स्थान सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। सही दिशा और नियमों के साथ स्थापित पूजा घर पूरे परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
हालांकि, कई बार हम जाने-अनजाने मंदिर के आसपास कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे घर के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इंटीरियर वास्तु प्लानर और कंसलटेंट रानी टिबड़ेवाल के अनुसार, मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ छोटी-छोटी लेकिन बेहद असरदार बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
वास्तु विशेषज्ञ रानी टिबड़ेवाल बताती हैं कि पूजा घर के आसपास कभी भी कबाड़ या सामान बिखरा हुआ नहीं होना चाहिए। मंदिर के आसपास फैली अव्यवस्था घर में नकारात्मकता बढ़ाती है।
इसके साथ ही, पूजा घर के ठीक सामने या आसपास जूते-चप्पल रखना सबसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। ऐसा करने से भगवान का अनादर होता है और घर की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए मंदिर के प्रवेश द्वार को हमेशा साफ और बाधा-मुक्त रखें।
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ईश्वर की आराधना का वास्तविक फल तभी मिलता है जब पूजा सच्चे और पवित्र भाव से की जाए। रानी टिबड़ेवाल का कहना है कि पूजा करते समय मन में गुस्सा, नकारात्मक विचार या मुख से गलत शब्द कभी नहीं निकलने चाहिए।
अशांत मन से की गई पूजा से घर में तनाव का माहौल बनता है। ईश्वर का ध्यान हमेशा शांत, स्थिर और प्रसन्न चित्त मन से करना चाहिए ताकि घर में मानसिक शांति का वास हो सके।
पूजा घर के वातावरण को पवित्र और जीवंत बनाए रखने के लिए दैनिक दिनचर्या में कुछ साधारण अभ्यास शामिल करें। रोज सुबह-शाम मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
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इसके अलावा, पूजा घर में हल्की और प्राकृतिक खुशबू वाली धूप या अगरबत्ती का प्रयोग करें। हल्की सुगंध से मन एकाग्र होता है और घर का वातावरण पूरे दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है।
Location : New Delhi
Published : 29 August 2026, 4:13 PM IST