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देवघर में भक्ति का अद्भुत संगम
Deoghar: रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के बीच स्नेह, सम्मान और सुरक्षा के सूत्र के रूप में जाना जाता है। लेकिन विश्वप्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ की नगरी देवघर में इस पर्व का एक ऐसा आध्यात्मिक रूप देखने को मिला, जो सनातन संस्कृति की महानता को दर्शाता है। यहाँ के तीर्थपुरोहितों ने संपूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोचार के साथ स्वयं सृष्टि के रक्षक ‘बाबा वैद्यनाथ’ को रक्षा सूत्र अर्पित किया।
बाबा वैद्यनाथ को द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आरोग्य और औषधि का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो ईश्वर पूरी दुनिया को संकटों से उबारते हैं और भक्तों को सुरक्षा का अभयदान देते हैं, उनके चरणों में रक्षा सूत्र समर्पित करना एक अनूठा भक्त-भगवान संबंध है। तीर्थपुरोहितों का मानना है कि यह अनुष्ठान ईश्वर से यह विनती करने का माध्यम है कि वे संपूर्ण विश्व पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
बाबा वैद्यनाथ धाम में रक्षाबंधन पर तीर्थपुरोहितों ने पूरे विधि-विधान से ज्योतिर्लिंग को रक्षा सूत्र अर्पित किया। सदियों पुरानी यह दिव्य परंपरा केवल व्यक्तिगत सुरक्षा की कामना नहीं, बल्कि बाबा भोलेनाथ से समस्त संसार की रक्षा, आरोग्यता और सर्व-लोक कल्याण की भावपूर्ण अलौकिक… pic.twitter.com/aKHsAZYAJ9
— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) August 28, 2026
मंदिर परिसर में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना का माहौल बना हुआ था। तीर्थपुरोहितों ने बाबा वैद्यनाथ के साथ-साथ माता पार्वती के शिखर पर भी परंपरा अनुसार पवित्र धागे का अर्पण किया। मंत्रों की गूंज और शंखनाद के बीच जब रक्षा सूत्र अर्पित किया गया, तो वहां उपस्थित श्रद्धालु भक्ति के इस अलौकिक दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे।
यह अनुष्ठान संदेश देता है कि रक्षा सूत्र सिर्फ एक परिवार या रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ पूरी मानव जाति का कल्याण करना है। देवघर का यह पारंपरिक आयोजन हर साल यह अहसास कराता है कि जब हम अपने रक्षक ईश्वर के प्रति श्रद्धा और समर्पण जताते हैं, तो पूरा समाज सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है।
Location : Deoghar
Published : 28 August 2026, 11:10 AM IST