यूुपी विधानसभा चुनाव सत्ता संघर्ष..आईये जानें कौन दिखा रहा है दम और कौन कितने पानी में?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा सरकार अपने काम, योजनाओं और संगठन के जरिए मैदान तैयार कर रही है, तो अखिलेश यादव की सपा PDA के सहारे सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 27 September 2026, 10:52 AM IST
google-preferred

Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब सिर्फ बैठकों और बयानों तक सीमित नहीं हैं। राजनीतिक दल जमीन पर उतरने लगे हैं। भाजपा सरकार अपने विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है, जबकि समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरण और जनहित से जुड़े वादों के साथ आगे बढ़ रही है। बसपा अपने संगठन और पुराने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुटी है। वहीं कांग्रेस बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

चुनाव कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ है, लेकिन 2027 के शुरुआती महीनों में चुनाव की संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख दलों की गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन क्या कह रहा है, बल्कि यह भी है कि आने वाले महीनों में कौन अपनी रणनीति को जमीन पर कितनी मजबूती से उतार पाता है।

सपा का PDA दांव और अखिलेश का रथ

समाजवादी पार्टी ने इस बार अपनी राजनीति के केंद्र में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को रखा है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार संगठन की बैठकों, जनसंपर्क और सामाजिक समूहों के बीच पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। सितंबर 2026 में उन्होंने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत भी कर दी है।

सपा की रणनीति में सिर्फ जातीय समीकरण ही नहीं, बल्कि युवा और महिला मतदाता भी महत्वपूर्ण हैं। पार्टी ने महिलाओं के लिए हर साल 40 हजार रुपये की सहायता, इंटर पास छात्राओं को लैपटॉप और छात्राओं के लिए परिवहन जैसी घोषणाएं की हैं। अखिलेश यादव ने 2027 में सत्ता में आने पर बंद पड़े 26 हजार प्राथमिक स्कूलों को फिर खोलने की बात भी कही है।

ये भी पढ़ें- अमरोहा सीट पर नया ट्विस्ट! क्या शमी का विकेट लेंगी हसीन जहां? टिकट के लिए कौन दल होगा मेहरबान

सपा पहले भी रथ यात्राओं को चुनावी अभियान का हिस्सा बना चुकी है। 2011-12 की क्रांति रथ यात्रा के बाद पार्टी को 2012 के चुनाव में 224 सीटें मिली थीं। 2016-17 की विकास रथ यात्रा के बाद तस्वीर अलग रही और सपा 47 सीटों पर सिमट गई। 2021-22 में समाजवादी विजय रथ यात्रा भी निकली थी और 2022 में पार्टी को 111 सीटें मिली थीं।

इस बार PDA रथ के जरिए अखिलेश यादव प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सामाजिक और राजनीतिक संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। सितंबर के आखिर में शुरू हुई इस यात्रा को पार्टी के 2027 अभियान की अहम कड़ी माना जा रहा है।

भाजपा का फोकस काम, योजनाओं और संगठन पर

सत्ताधारी भाजपा के सामने 2027 में अपने शासन का रिकॉर्ड जनता के सामने रखने की चुनौती है। पार्टी की ओर से विकास, कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी है। भाजपा नेताओं ने हाल के दिनों में साफ तौर पर सरकार के पिछले वर्षों के काम को चुनावी अभियान का आधार बनाने की बात कही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की ओर से युवाओं और महिलाओं पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। हाल में युवाओं को नियुक्ति पत्र देने, छात्राओं के लिए स्कूटी और महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा जैसी योजनाओं और घोषणाओं को सामने रखा गया है।

भाजपा संगठन भी बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने में लगा है। सितंबर में पार्टी ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया, जिसमें जनसंपर्क, सरकारी योजनाओं से लोगों को जोड़ने और सरकार के काम को जनता तक पहुंचाने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। दूसरी तरफ भाजपा की रणनीति में हिंदुत्व का मुद्दा भी मौजूद है। पार्टी के नेता विकास और कानून-व्यवस्था के साथ अपनी पारंपरिक राजनीतिक लाइन को भी आगे बढ़ा रहे हैं।

मायावती की बसपा: अकेले चुनाव लड़ने का फैसला

बहुजन समाज पार्टी के लिए 2027 का चुनाव संगठन और राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश के लिहाज से अहम है। मायावती ने अगस्त 2026 में साफ कर दिया कि बसपा उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर दिया है।

पार्टी संभावित उम्मीदवारों और विधानसभा प्रभारियों के जरिए अपनी तैयारी आगे बढ़ा रही है। बसपा का जोर अपने पारंपरिक सामाजिक आधार को बनाए रखने के साथ-साथ दूसरे वर्गों तक पहुंच बढ़ाने पर भी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पार्टी 40 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की घोषणा कर चुकी है।

बसपा के लिए चुनौती यह है कि संगठन को सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि मतदान केंद्र तक सक्रिय किया जाए। यही वजह है कि पार्टी चुनाव से काफी पहले संगठनात्मक तैयारियों पर जोर दे रही है।

कांग्रेस का बूथ से वापसी का प्लान

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस भी 2027 के लिए संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में जुटी है। पार्टी ने बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। जुलाई में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करने को अहम बताया था।

ये भी पढ़ें- CEC ज्ञानेश कुमार पर राहुल गांधी का फिर हमला, ‘मैच फिक्सिंग’ का आरोप; चुनाव आयोग ने कहा- SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से

अगस्त में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर संगठन तैयार करने और अलग-अलग सामाजिक समूहों से संवाद बढ़ाने पर काम कर रही थी। पार्टी किसानों, दलितों, ओबीसी, अल्पसंख्यकों, छात्रों और युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।

सपा के साथ गठबंधन भी कांग्रेस की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सितंबर में PDA रथ यात्रा शुरू करते हुए अखिलेश यादव ने संकेत दिया कि सपा-कांग्रेस गठबंधन बना रहेगा और सीट बंटवारे में जीतने की क्षमता को आधार बनाया जाएगा।

असली मुकाबला मुद्दों और संगठन का होगा

2027 का चुनाव अभी दूर नहीं है, लेकिन तस्वीर पूरी तरह साफ भी नहीं हुई है। भाजपा के पास सरकार के काम और योजनाओं का मुद्दा है। सपा सामाजिक समीकरण, रोजगार, महंगाई और कल्याणकारी योजनाओं के वादों के साथ मैदान में है। बसपा अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, जबकि कांग्रेस संगठन को मजबूत करके अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। आने वाले महीनों में टिकट वितरण, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों का चयन और बूथ स्तर की सक्रियता जैसे कई फैक्टर तस्वीर बदल सकते हैं।

Location :  Lucknow

Published :  27 September 2026, 10:52 AM IST

Related News

Advertisement