दिल्ली से लखनऊ तक सियासी हलचल तेज, अखिलेश यादव और सौगत रॉय की मुलाकात से कांग्रेस की धड़कनें बढ़ी

सपा प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद सौगत रॉय की मुलाकात से यूपी की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इस सियासी मेलजोल को कांग्रेस के लिए बड़ा अलर्ट माना जा रहा है।

Updated : 30 July 2026, 11:55 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बड़े राजनीतिक समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय के बीच हुई एक खास मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

फ्रंटफुट पर अखिलेश, विपक्ष को एकजुट करने की कवायद

विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं। वह छात्रों के आंदोलन से जुड़े मुद्दों और अन्यतय अहम मामलों को लेकर लगातार बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं। सदन के भीतर उनकी यह आक्रामक शैली और विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव अपनी इस सक्रियता के जरिए यूपी चुनाव 2027 की जमीन अभी से तैयार कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर साझा की तस्वीर, सियासी मायने तलाशने शुरू

सपा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन लिखा- 'तजुर्बों से मुलाकात'।

सौगत रॉय पश्चिम बंगाल के दमदम लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं। वह राजनीति के अलावा पेशे से भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर और वकील भी रह चुके हैं तथा केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अखिलेश यादव की उनके साथ हुई इस मुलाकात को उत्तर प्रदेश के सियासी परिदृश्य में काफी अहम माना जा रहा है।

कांग्रेस के लिए बढ़ी चिंता की लकीरें?

अखिलेश यादव का टीएमसी की तरफ इस तरह से नजदीकियां बढ़ाना कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़े अलर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी के बीच सियासी रिश्ते बहुत सहज नहीं रहे हैं, और दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ते रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर भले ही दोनों दल 'इंडी गठबंधन' का हिस्सा हों, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर सपा और टीएमसी की बढ़ती नजदीकियां कांग्रेस के लिए नई चिंताएं पैदा कर सकती हैं।

2027 के चुनाव पर सस्पेंस बरकरार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में गठबंधन को लेकर अखिलेश यादव ने अभी तक अपने पत्ते पूरी तरह से नहीं खोले हैं। हाल ही में दिल्ली में हुई 'इंडी गठबंधन' की बैठक के दौरान अखिलेश ने प्रदेश के कुछ कांग्रेसी नेताओं के बयानों पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि लोकसभा चुनाव 2024 में हमारा गठबंधन था, लेकिन विधानसभा चुनाव को लेकर स्थिति अभी दूर की कौड़ी है।

दूसरी ओर, कांग्रेस की तरफ से भी अपनी तैयारियां अकेले दम पर मजबूत करने के संकेत दिए जा चुके हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद ने पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अपनी तैयारी रखने की बात कही थी।

बहरहाल, मानसून सत्र के दौरान अखिलेश यादव की बढ़ती सक्रियता और टीएमसी सांसद के साथ इस मुलाकात ने यूपी के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दलों की यह एकजुटता चुनावी मैदान में क्या नया रंग दिखाती है।

 

 

 

Location :  Lucknow

Published :  30 July 2026, 11:55 AM IST

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