मंजू हत्याकांड: 20 साल बाद फैसला, ‘इसे नहीं मुझे मार डालो’ कहने वाली किशोरी की मौत में आरोपी को 5 साल कैद

अलीगढ़ के चर्चित मंजू हत्याकांड में करीब 20 साल बाद अदालत ने एक और आरोपी संतोष को दोषी ठहराते हुए पांच साल की कैद की सजा सुनाई है। 2006 में 16 वर्षीय मंजू ने एक युवक को बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी थी...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 18 September 2026, 3:43 PM IST
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Aligarh News: अलीगढ़ के विजयगढ़ थाना क्षेत्र में करीब 20 साल पहले हुए एक खौफनाक हत्याकांड में अदालत ने एक और आरोपी को सजा सुनाई है। मामला गांव परौरी के चर्चित मंजू हत्याकांड का है, जहां 16 साल की किशोरी ने एक युवक की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी थी। उस रात मंजू ने हमलावरों से गुहार लगाई थी कि विपिन को छोड़ दें और उसकी जगह उसे मार दें। इसके बाद आरोपियों ने उसी पर हमला कर दिया था, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 विपिन कुमार-द्वितीय की अदालत ने मामले में आरोपी संतोष को दोषी मानते हुए पांच साल के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना जमा नहीं करने पर उसे दो महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

विपिन को बचाने पहुंची थी मंजू, खुद बन गई शिकार

घटना 26 सितंबर 2006 की रात करीब 9 बजे की है। अलीगढ़ के गांव परौरी में कुछ लोग विपिन नाम के युवक को पीटते हुए अपने साथ ले जा रहे थे। शोर सुनकर गांव के लाखन सिंह की 16 वर्षीय बेटी मंजू मौके पर पहुंच गई। बताया गया कि मंजू ने हमलावरों से हाथ जोड़कर कहा था कि विपिन को छोड़ दें। उसने कहा था कि अगर मारना ही है तो उसे मार दें। लेकिन इसके बाद आरोपियों ने मंजू पर ही हमला कर दिया। हमलावरों ने उसके साथ लात-घूंसों और डंडों से बेरहमी से मारपीट की। गंभीर चोटों और गला दबाने की वजह से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई थी क्रूरता

मंजू के शव का पोस्टमार्टम जिला अस्पताल के डॉक्टर एसके वार्ष्णेय ने किया था। रिपोर्ट में उसके शरीर पर कई चोटों के निशान मिले थे। जांच में सामने आया था कि उसका गला इतनी जोर से दबाया गया था कि गले की हड्डी (हायड बोन) तक टूट गई थी। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और लंबे समय तक यह हत्याकांड चर्चा में रहा।

गवाहों की गवाही से मजबूत हुआ मामला

मामले की सुनवाई के दौरान फगुनी, रूपवती, धर्मपाल और बैनामी समेत कई गवाहों के बयान अहम रहे। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों का विश्लेषण करने के बाद आरोपी संतोष को दोषी करार दिया। इससे पहले इस मामले में सह-अभियुक्त रहे लाखन सिंह, रमेशचंद्र, निहाल उर्फ नहना और कालू उर्फ जयराम को 25 मई 2019 को दोषी ठहराया जा चुका है। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी संतोष को न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया। करीब दो दशक पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार को एक और कानूनी राहत मिली है।

Location :  Aligarh

Published :  18 September 2026, 3:43 PM IST

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